इस दौरान वहां कार्य कर रहा आपरेटर विजय बहादुर निवासी मंदर, थाना हंडिया प्रयागराज सहित राजेश निवासी नई बस्ती थाना मुगलसराय व शिवराज यादव निवासी जलालपुर थाना अलीनगर घायल हो गए। घटना के बाद आनन फानन में फैक्ट्री में मौजूद कर्मचारियों ने घायलों को वाराणसी स्थित निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। इस संबंध में फैक्ट्री के मैनेजर एलके दीक्षित ने बताया कि घटना आपरेटर की चूक से हुआ है। घायलों का उपचार निजी चिकित्सालय में कराया जा रहा है।
17 वर्ष पूर्व भी हो चुकी है घटना
चंदासी स्थित इंडियन एयर गैस लिमिटेड फैक्ट्री में 17 वर्ष पूर्व भी विस्फोट हो चुका है। लोगों ने बताया कि उस दौरान भी एसिटिलीन गैस का सिलिंडर रखने के दौरान विस्फोट हो गया और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। बताया कि जाता है कि फैक्ट्री लगभग 64 साल पुरानी है।
ऐसे में यहां लगे उपकरण भी काफी पुराने हो चुके होंगे और उन्हीं से सिलिंडर में गैस भरे जाने का कार्य होता है। जिस वक्त यहां फैक्ट्री लगाई गई तो उस वक्त यहां आबादी नहीं थी। आज धीरे-धीरे फैक्ट्री के इर्द गिर्द काफी आबादी बस चुकी है। ऐसे में कभी कोई बड़ा विस्फोट हुआ तो उससे काफी जानमाल के नुकसान की आशंका है।
एलपीजी गैस के मिलावट का भी होता है खेल
चंदासी स्थित फैक्ट्री में आक्सीजन के अलावा एसिटिलीन गैस तैयार करने का कार्य किया जाता है। इसकी आड़ में एसिटिलीन गैस के सिलिंडर में एलपीजी गैस को भरकर बेचा जाता है। सूत्र का कहना है कि एक सिलिंडर में लगभग साढ़े छह किलो एसिटिलीन गैस होती है जिसकी कीमत 15 सौ रुपये पड़ती है।
जबकि एक हजार रुपये में कार्मिशियल एलपीजी सिलिंडर में लगभग 19 किलो गैस मिल जाती है। फैक्ट्री के एसिटिलीन के सिलिंडर में एलपीजी गैैस भरकर लोहे की कटिंग के लिए बेचा जाता है। फैक्ट्री में चल रहा यह खेल किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है।