फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब अधर्म बढ़ता है तब भगवान अवतरित होते हैं : पूर्णिमा

विज्ञापन
विज्ञापन
शहाबगंज। अमांव गांव स्थित कर्मनाशा नदी के तट पर बाबा मुरलीधर खेल मैदान में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा एवं अमृत वर्षा के तीसरे दिन व्यास श्रीधाम वृंदावन से पधारीं पूर्णिमा त्रिपाठी ने भगवान श्रीराम के जन्म की कथा सुनाई। कथा सुनकर भक्त भावविभोर हो गए। पूर्णिमा ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान स्वयं अवतरित होकर अधर्म का नाश करते हैं।
विज्ञापन

कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी’ की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जन्म केवल अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण हेतु हुआ था। उन्होंने कहा कि नारद मोह प्रसंग में ऋषि नारद ने जिस माया के प्रभाव में भगवान की लीलाओं को देखा वह भगवान के अवतार की भूमिका का प्रारंभिक संकेत था नारद जी का मोह यह बताता है कि परम ज्ञानी भी भगवान की लीला में पड़कर उनके स्वरूप को समझने में असमर्थ हो जाते हैं
पूर्णिमा त्रिपाठी ने कहा कि जब धरती पापों से कराह उठी, तब देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास जाकर विनती की। तभी भगवान विष्णु ने कहा कि अब मैं स्वयं अयोध्या में जन्म लेकर रावण के अत्याचार से धरती का उद्धार करूंगा। दशरथ नंदन श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालु जय श्रीराम के जयघोष से पूरा कथा पंडाल गुंजायमान हो उठा राम जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि यह संदेश है कि जब जीवन में अधर्म, अन्याय और अहंकार का अंधकार छा जाए तब सच्चाई, प्रेम और करुणा के रूप में ‘रामत्व’ को प्रकट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कौसल्या के गर्भ से भगवान का अवतरण करुणा भक्ति और मर्यादा की मूर्ति के रूप में हुआ कथा के दौरान राजू चौहान, डा.श्याम नारायण, वंश नारायण यादव,अनिल, बब्बू जायसवाल, सुनिल, रामपति बाबा, धीरज यादव, फकिर यादव, दिपक पाठक, रामचरित विश्वकर्मा आदि थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें