धानापुर। ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और प्रधानमंत्री मुद्रा लोन का लाभ दिलाने का झांसा देकर बैंक खाते खुलवाने और उनमें साइबर ठगी की रकम मंगाने वाले गिरोह के दो सदस्यों आशीष विश्वकर्मा और रोहित कुमार उर्फ काला को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया है। रोहित कुमार उर्फ काला एक्सिस बैंक में कर्मचारी रह चुका है। पुलिस के अनुसार, उसने बैंक में तैनाती के दौरान 300 से ज्यादा खाते खुलवाए थे। इन खातों के साइबर अपराध में संलिप्तता की जांच की जा रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक अनंत चंद्रशेखर ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने आरोपियों को ओदरा मार्ग से दोपहर 12:20 बजे गिरफ्तार किया। इनमें धीना थाना क्षेत्र के पसाई गांव निवासी आशीष विश्वकर्मा (22) और बलुआ थाना क्षेत्र के सेवढ़ी मड़ई गांव निवासी रोहित कुमार उर्फ काला (31) शामिल है।
उन्होंने बताया कि गिरोह का नेटवर्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा तक फैला है। फिलहाल चार संदिग्ध म्यूल खातों के प्रारंभिक विश्लेषण में इनके खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 18 शिकायतें मिली हैं। इनमें करीब 2.50 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज है। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, कूटरचित आधार कार्ड, एक एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद हुई है।
खाताधारकों से लेते थे एटीएम कार्ड और ओटीपी का एक्सेस
पुलिस ने बताया कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर गरीब लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए जीरो बैलेंस पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खाताधारकों से एटीएम कार्ड और ओटीपी का एक्सेस हासिल कर गिरोह को पूरी जानकारी भेज दी जाती थी। आरोपियों के अनुसार, मुंबई में बैठे उनके सहयोगी फर्जी लोन वेबसाइट और भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से ठगी कर इन्हीं खातों में रकम मंगाते थे। बाद में एटीएम कार्ड के जरिये रुपये निकालकर गिरोह में बांट दिए जाते थे।
300 खातों की जांच से खुल सकता है बड़ा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, रोहित कुमार एक्सिस बैंक सकलडीहा में कर्मचारी था, तब उसने करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे। बैंक में संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। पुलिस का दावा है कि बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी का इस्तेमाल उसने साइबर अपराध के लिए किया और अपने साथियों को भी खातों के इस्तेमाल का तरीका बताया। पुलिस ने चार बैंक खातों का प्रारंभिक विश्लेषण किया है। इन खातों के खिलाफ साइबर फ्रॉड की 18 शिकायतें मिली हैं। पुलिस सभी 300 खातों की जांच कर रही है। इससे बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
-
आधार कार्ड पर बदल देते थे पहचान
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। जांच से बचने के लिए आरोपी फर्जी आधार कार्ड का भी इस्तेमाल करते थे। पूछताछ में आशीष ने कथित तौर पर बताया कि उसने अन्य लोगों के नाम-पते वाले आधार कार्ड पर अपनी फोटो लगाकर उसका इस्तेमाल किया था।
पीड़ितों के खातों से लाखों के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
22 फरवरी 2026 को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज हुई थी। असना गांव निवासी एहतशामुद्दीन और उनके साथियों ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2024 में एक्सिस बैंक के कर्मचारी रोहित कुमार और उसके साथी रावण उर्फ शुभम ने सरकारी सुविधाओं का लालच देकर उनके खाते खुलवाए थे। इसके बाद उन्हें पासबुक दे दी गई, लेकिन एटीएम कार्ड नहीं दिया गया। बाद में उनके ई-मेल पर बैंक खातों में भारी लेनदेन के मेसेज आने लगे। बैंक जाकर जानकारी की तो खातों से लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम के लेनदेन का मामला सामने आया।