एक किमी सड़क पर 24 घंटे विचरण करते हैं 50-60 पशु
पड़ाव से लेकर डांडी तक सिक्स लेन के लगभग एक किलोमीटर लंबे हिस्से में इन दिनों 50 से 60 छुट्टा पशु दिन-रात विचरण करते हैं। इनमें सांडों की संख्या अधिक है। स्थानीय लोगों के अनुसार पशु कभी डिवाइडर पर बैठ जाते हैं तो कभी अचानक सड़क पर दौड़ पड़ते हैं, जिससे वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। लोगों का कहना है कि हर दूसरे-तीसरे दिन कोई न कोई हादसा जरूर होता है, लेकिन अब तक न तो नगर निकाय और न ही पशुपालन विभाग ने इन्हें पकड़ने के लिए एक भी अभियान नहीं चलाया है।
आठ किमी सिक्स लेन पर नहीं है एक भी लाइट, अंधेरे से होते हैं हादसे
विडंबना यह है कि पड़ाव से पीडीडीयू नगर तक करीब आठ किलोमीटर लंबी सिक्स लेन सड़क का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन स्ट्रीट लाइट लगाने की व्यवस्था नहीं की गई। शाम होते ही पूरा मार्ग घोर अंधेरे में डूब जाता है। अंधेरे में न तो पशु नजर आते हैं और न ही सड़क पर मौजूद अन्य अवरोध। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के साथ हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
इसी सांड़ से लड़ कर युवक की हुई थी माैत।
- फोटो : संवाद
केस 1: 13 दिसंबर 2025 को सकलडीहा विकासखंड के बैराठ गांव में जगजीवन नाम के 60 वर्षीय बुजुर्ग को सांड ने हमला कर जख्मी कर दिया। उनको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां तीन दिन बाद वे घर तो आ गए लेकिन एक महीने बाद भी वे चल फिर नहीं पा रहे है।
केस 2: 13 सितंबर 2023 को नौगढ़ कस्बे के बाजार किला रोड पर सांड ने हमला कर पांच लोगों हो लहूलुहान कर दिया। जिसमें एक बुजुर्ग की मौत हो गई। वहीं घायलों में 50 वर्षीय संतोष आज भी बेड से उठ नहीं पाते हैं।
छुटा पशुओं पर हर साल खर्च हो जाते हैं साढ़े तीन करोड़ रुपये
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी योगेश कुशवाहा के अनुसार चंदौली जिले में छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए 23 गो आश्रय केंद्र बनाए गए हैं। जहां अभी 1950 छुट्टा पशु रखे गए हैं। प्रत्येक पशु पर एक दिन में 50 रुपये खर्च होते हैं। यानि एक दिन में सभी पशुओं पर कुल 97,500 रुपये खर्च हो जाते हैं। यानि एक साल में 3 करोड़ 55 लाख 87 हजार 500 रुपये खर्च हो जाते हैं। 2019 से यह योजना चली है। ऐसे में 6 वर्षों में छुट्टा पशुओं पर करीब 21 करोड़ से ज्यादा पैसे खर्च हो चुके हैं। इसके बाद भी स्थिति यह है कि सड़कों पर छुट्टा पशु घूम रहे हैं।
ग्रामीणों ने व्यक्त की पीड़ा
पड़ाव से लेकर डांडी तक 60 से ज्यादा छुट्टा पशु जिनमें साड़ ज्यादा है, 24 घंटे सड़क पर विचरण करते हैं। इससे हर दूसरे दिन कोई न कोई हादसा हो जाता है। सोमवार की रात काले साड़ से टकराकर युवक की मौत हो गई। - जनुराग तिवारी, निवासी, डांडी
पड़ाव से लेकर डांडी तक डिवाडर पर और सड़क पर पशुओं की भरमार है। इस मार्ग पर लगभग रोज ही जिले के आलाधिकारी गुजरते हैं। लोगों के चोटिल होने और मरने की खबरें उनतक जाती होंगे लेकिन एक बार भी यहां के एक भी पशु को पकड़ने और गो आश्रय ले जाने की पहल नहीं हुई। - किशन पटेल, डांडी
छुट्टा पशुओं को पकड़ने की जिम्मेदारी निकायों की है। वैसे पशु चिकित्सक भी इसकी सूचना विभाग को देते हैं। पड़ाव से डांडी तक पशुओें की अधिकता की जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारी को मैं खुद दूंगा और जल्द से जल्द पशुओं को वहां से हटाया जाएगा। - योगेश कुशवाहा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी