राजदरी। वन विभाग को लाखों का राजस्व देने वाले राजदरी और देवदरी जलप्रपात में पर्यटकों को पानी भी मयस्सर नहीं है। यहां दो करोड़ से अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित करने का दावा किया जा रहा है लेकिन बुनियादी सुविधाएं भी पर्यटकों को नहीं मिल पा रही है। पर्यटक स्थानीय लोगों की तरह चुआड़ का पानी पीने को मजबूर हैं।
राजदरी-देवदरी जलप्रपात की प्राकृतिक छटा निहारने हर वर्ष डेढ़ लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। प्रत्येक पर्यटक से गेट पर 50 रुपये लिए जाते हैं लेकिन सुविधाएं नाममात्र की भी नहीं है। पर्यटन विभाग ने पिछले साल ही दो करोड़ से यहां सुविधाएं बढ़ाने का दावा कर रहा है। लेकिन जलप्रपात पर जाने वाले पर्यटकों के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं है। पर्यटक भी बोतल के पानी का सहारा लेते हुए ओवर रेटिंग दाम में खरीदने को मजबूर हो जाते हैं। अमर उजाला से बातचीत के दौरान वाराणसी के निवासी सनी कुमार ने बताया कि पानी के साथ साथ कई चीजों का अभाव है।जिससे सैलानियों को चकिया से पानी खरीदकर उसी के सहारे जंगल का सैर सपाटा करना पड़ रहा है। राजदरी परिसर में कैंटीन है, में जहां ओवर रेटिंग दाम में सामान दिया जाता है।जिससे एक बार के बाद कई पर्यटक तो दोबारा आने से कतराते हैं।