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Chandauli News: काशी से चंदौली-मिर्जापुर तक बने पर्यटन कॉरिडोर, बढ़ेगा रोजगार

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पीडीडीयू नगर। चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने वाराणसी, चंदौली और मिर्जापुर को जोड़कर पर्यटन एवं आध्यात्मिक कॉरिडोर विकसित करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र जारी कर काशी को केवल वाराणसी की भौगोलिक सीमा तक सीमित न रखते हुए पूरे पूर्वांचल के पर्यटन, आध्यात्मिकता, संस्कृति और आर्थिक विकास का द्वार बनाने की मांग की है। सांसद ने पत्र में कहा है कि केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के समक्ष भी चंदौली और आसपास के क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को रखा जा चुका है।
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सांसद ने पत्र में लिखा है कि पर्यटन और विकास की अनेक योजनाओं के चलते काशी की पहचान देश-दुनिया में और मजबूत हुई है। ऐसे में आसपास के धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को भी समेकित पर्यटन परिपथ में शामिल किया जाए, ताकि काशी आने वाले पर्यटक पड़ोसी जिलों की समृद्ध विरासत से परिचित हो सकें।



सांसद ने कहा कि वाराणसी-चंदौली के पास बलुआ में गंगा के पश्चिममुखी प्रवाह को धार्मिक मान्यताओं में विशिष्ट माना जाता है। इस क्षेत्र में स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्व बताया जाता है। बलुआ क्षेत्र महर्षि वाल्मीकि मंदिर, वाल्मीकि कुंड और मार्कंडेय महादेव मंदिर जैसे धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों से भी जुड़ा है। इसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने की जरूरत है।
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संत परंपरा और धार्मिक विरासत को मिले पहचान

सांसद ने पत्र में चंदौली के गंगा किनारे बसे क्षेत्रों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र बाबा कीनाराम, मौनी बाबा, त्रिदंडी स्वामी, स्वामी प्रेमानंद जी और खड़िया बाबा जैसी संत परंपराओं से जुड़ा रहा है। बरठी स्थित बाबा कालेश्वर नाथ सहित वैष्णव परंपरा से जुड़े अनेक धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया है।



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किलों से लेकर जलप्रपातों तक फैला प्राकृतिक खजाना



सांसद ने बाबू देवकीनंदन खत्री के प्रसिद्ध उपन्यास ‘चंद्रकांता’ से जुड़े नवगढ़ के किले के साथ नवगढ़ बांध, राजगढ़ और विजयगढ़ के किले को विकसित करने की बात कही है। राजदारी, देवदारी और लखनिया दरी जैसे प्राकृतिक स्थलों को भी पर्यटन सर्किट में शामिल करने का सुझाव दिया है। मिर्जापुर के ऐतिहासिक चुनार किले को भी इस परिपथ से जोड़ने की बात कही है। यदि वाराणसी, चंदौली और मिर्जापुर के इन स्थलों को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाए तो काशी आने वाले पर्यटकों का प्रवास बढ़ाया जा सकता है।
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