नगर में फोरलेन निर्माण कार्य के साथ-साथ बिजली के खंभे और पेयजल पाइपलाइन डालने का काम भी चल रहा है।
पानी की पाइपलाइन नाले के बगल से बिछाने का नियम है लेकिन कैलाशपुरी तिराहे के पास कुछ होटल, माॅल और दुकानों की सीढ़ी बचाने के लिए कार्यदायी संस्था ने नाले में 20 मीटर तक पानी की पाइपलाइन बिछा दी है।
खुलेआम नियमों की अनदेखी की गई है कोई रोकने और टोकने वाला नहीं है। पड़ाव से गोधना तक की 14 किलोमीटर की सड़क को 328.28 करोड़ से फोरलेन और सिक्स लेन बनाया जा रहा है।
कार्यदायी संस्था को सड़क निर्माण के साथ ही नाला निर्माण भी करना है और इसके साथ ही बिजली के खंभे और पानी की नई पाइपलाइन भी डालनी है। निर्माण में लापरवाही की कई शिकायतें मिल चुकी हैं। अब ताजा मामला पानी की पाइप लाइन को नाले में डालने का आया है। कार्यदायी संस्थान ने नाले किनारे खोदाई कर पाइपलाइन बिछाने के बजाय कैलाशपुरी तिराहे के पास कुछ होटल, मॉल और दुकानों की सीढि़यां बचाने के लिए पाइपलाइन को करीब 20 मीटर सीधे नाले में बिछा दी गई है। इसके पहले हर जगह पाइपलाइन नाले के किनारे बिछाई गई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कभी भी पाइपलाइन में लिकेज होगा तो गंदा पानी घरों तक पहुंच जाएगा।
कार्यदायी संस्था ने इस कार्य को कुछ होटल संचालक और दुकानदारों के दबाव में किया है। विडंबना यह है कि पाइपलाइन का कनेक्शन भी पूरा हो चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी इस पर कोई रोक-टोक नहीं कर रहे। न तो जांच की जा रही है और न ही पाइपलाइन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की पहल की जा रही है। लोगों का कहना है कि कभी पाइपलाइन में लीकेज हुआ तो लोगों को गंदा पानी पीना पड़ेगा। इससे बीमारी फैलेगी।
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन राजेश कुमार ने कहा कि नाले में पानी की पाइपलाइन डालना बिल्कुल गलत है।
पानी की पाइपलाइन को नाले के किनारे ही खोदाई कर डाला जाना है और हर जगह डाला गया है।
इधर कंपनी के कुछ नए कर्मचारी आ गए हैं शायद इसलिए गलती हुई है। इसको तुरंत ठीक कराया जाएगा। संवाद