फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandauli News: 10 साल से ज्यादा समय से अधर में तीन सीएचसी और ट्रॉमा सेंटर, कहीं भवन अधूरा तो कहीं डॉक्टर, कर्मचारी नहीं

विज्ञापन
चहनियां में अधूरा पड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। जिले में अस्पतालों के निर्माण की परियोजनाएं सरकारी सिस्टम की सुस्ती, जांच और विभागीय औपचारिकताओं में उलझकर रह गई हैं। तीन सीएचसी और एक ट्राॅमा सेंटर का निर्माण डेढ़ दशक बाद भी पूरा नहीं हो सका। इनमें कई अस्पतालों के भवन बनने के बाद उनका संचालन शुरू नहीं हो पाया। एकौनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास 17 साल पहले हुआ था, लेकिन इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। बबुरी में सीएचसी का निर्माण पूरा होने के बाद 12 साल से मरीजों को इलाज मिलने का इंतजार है। वहीं, महेवा का ट्राॅमा सेंटर भी आठ साल बाद तैयार गया है लेकिन चालू नहीं हुआ।
विज्ञापन

इन अस्पतालों का निर्माण शुरू होने के समय स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी थी कि सामान्य बीमारी, प्रसव, दुर्घटना और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए उन्हें जिला अस्पताल या वाराणसी नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को आज भी 20 से 50 किलोमीटर तक की दूरी तय कर जिला अस्पताल, निजी अस्पताल या दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों तक जाना पड़ता है। इससे समय के साथ इलाज का खर्च भी बढ़ रहा है।

केस-1 : बरहनी सीएचसी पर 4.21 करोड़ खर्च, फिर भी भवन अधूरा
कंदवा। बरहनी में वर्ष 2010 में 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को मंजूरी मिली थी। करीब 4.21 करोड़ रुपये से अस्पताल का निर्माण वर्ष 2012 तक पूरा होना था, लेकिन समय सीमा बीतने के वर्षों बाद भी भवन अधूरा है। भवन अब खंडहर में तब्दील हो रहा है। जांच में कई खामियां सामने आने पर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे। मामला आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा गया और निर्माण निगम के अभियंताओं के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। इसी दौरान ठेकेदार की मौत हो गई। बरहनी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि लखनऊ की टीम ने भवन की जांच की थी। जांच रिपोर्ट के संबंध में जानकारी नहीं है।
विज्ञापन


केस-2 : महेवा ट्राॅमा सेंटर चालू होने का इंतजार
नियामताबाद। महेवा गांव में नेशनल हाईवे के किनारे करीब 16.39 करोड़ रुपये की लागत से बने ट्रामा सेंटर का शिलान्यास वर्ष 2018 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने किया था। यहां 20 बेड की सुविधा प्रस्तावित है, जिसमें 10 आईसीयू और 10 जनरल वार्ड के बेड शामिल हैं। भवन और आवासीय परिसर का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन मेडिकल स्टाफ की तैनाती और हैंडओवर की औपचारिक पूरी नहीं होने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
-
केस-3 : 12 साल बाद भी बबुरी सीएचसी का संचालन नहीं
बबुरी। स्थानीय विकास खंड में 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास वर्ष 2014 में हुआ था। भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन 12 वर्ष बाद भी इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। 90 गांवों की करीब सवा लाख आबादी इसके चालू होने के इंतजार में है। क्षेत्र के मरीजों को 20 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल या अन्य अस्पतालों में जाना पड़ता है। विधायक रमेश जायसवाल ने उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को पत्रक भी दिया था, लेकिन अब तक संचालन शुरू नहीं हो पाया।

केस-4 : एकौनी में 17 साल बाद भी सीएचसी अधूरा
नियामताबाद। एकौनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास वर्ष 2009 में हुआ था। मुख्य भवन तैयार है, लेकिन डॉक्टर और कर्मचारियों का आवासीय परिसर अधूरा पड़ा है। करीब चार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। भ्रष्टाचार की शिकायत पर राजकीय निर्माण निगम के इंजीनियरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी और आर्थिक अपराध शाखा जांच कर रही है। 17 साल बाद भी जांच पूरी नहीं होने से अस्पताल का संचालन अटका हुआ है।

करोड़ों के भवन, इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पतालों के निर्माण की घोषणा होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि गांव के आसपास ही बेहतर इलाज मिलेगा। कई जगह भवन तैयार होने के बावजूद दरवाजे नहीं खुले। जिन भवनों का निर्माण पूरा नहीं हुआ, वे वर्षों से मौसम की मार झेल रहे हैं। कई भवनों में झाड़ियां उग आई हैं और उनकी हालत खराब होती जा रही है।
-
इनसेट
-
ग्रामीणों बोले-

सीएचसी का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तो उम्मीद जगी थी कि अब इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कई साल बाद भी अस्पताल का भवन अधूरा पड़ा है। - दरोगा राय, डैना


सीएचसी नहीं होने से मरीजों को चंदौली या निजी अस्पताल ले जाना पड़ता है। इलाज के खर्च का सबसे अधिक असर गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। - रमेश राय, पई

जिला या निजी अस्पताल जाने में समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। सरकार को अधूरे भवन का निर्माण जल्द पूरा कराकर अस्पताल शुरू कराना चाहिए। - मनीष सिंह, जमुड़ा

करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अस्पताल तैयार नहीं हो सका। मामले की जांच पूरी कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ भवन का निर्माण कराया जाना चाहिए। - शिव बच्चन सिंह, चिरईगांव
विज्ञापन

चहनियां में अधूरा पड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें