सबद कीर्तन सुनतीं महिलाएं।
बैसाखी पर्व जिले में धूमधाम से मनाया गया। नगर के गुरुद्वारा में विशेष दीवान सजाया गया और अटूट लंगर में हजारों लोगों ने प्रसाद चखा। इस दौरान गुरुद्वारा परिसर में मेला लगा। दिन भर जो बोले सो निहाल के नारे से गुरुद्वारा गुंजायमान रहा और शबद कीर्तन की गूंज से माहौल भक्तिमय रहा।
तीन दिवसीय समारोह के अंतिम दिन सुबह से ही गुरुद्वारा में भक्तों की भीड़ जुटने लगी। सुबह साढ़े दस बजे गुरुद्वारा में प्रसिद्ध रागी जत्था कुलदीप सिंह, हुजूरी रागी जत्था दरबार साहिब अमृतसर, सहारनपुर से आए गुरमीत सिंह, पटना से आए कथा वाचक सुखदेव सिंह,जयपाल सिंह और ज्ञानी भाई साहिब ने संगत कर भक्तों को निहाल किया। इस दौरान साथ संगतों के लिए लस्सी वितरित की गई। गुरुद्वारा में स्थानीय भक्तों के साथ ही मिर्जापुर, चुनार, अहरौरा, चकिया, वाराणसी, चंदौली, सैयदराजा आदि से सिख समुदाय के लोग पहुंचे। दोपहर में दो बजे से गुरुद्वारा में अटूट लंगर की शुरुआत की गई तो यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। गुरुद्वारा के बाहर मेला लगा। यहां लोगों ने खूब खरीददारी की। इस दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम रहे। इस अवसर पर रामेन्द्र सिंह, रंजीत सिंह, मोहन सिंह, जोगिंदर सिंह, गुरुदयाल सिंह, सतपाल सिंह सूरी, सरदार महेन्द्र सिंह, रविन्द्र सिंह, अभिषेक, तारा, जसवीर सिंह, कवलजीत सिंह, सरदार अवतार सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन नरेन्द्रपाल सिंह ने किया।