जिले में करोड़ों रुपये खर्च कर कायाकल्प योजना चलाए जाने के बावजूद आठ से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं जहां तक पहुंचने के लिए आज भी न तो सड़क है और न ही पक्का रास्ता। बच्चे और शिक्षक खेतों की मेड़ों व पगडंडियों से होकर विद्यालय जाने को मजबूर हैं।
बरसात में यही रास्ते कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। वहीं 15 से ज्यादा विद्यालयों के रास्ते कच्चे हैं। जो बारिश के बाद से कीचड़ सने हुए हैं। इसी से होकर आना-जाना बच्चों की मजबूरी है।
विद्यालय का कोई रास्ता नहीं, मेड़ों से होकर जाते हैं बच्चे
धानापुर ब्लॉक के महुरा गांव में विद्यालय तक कोई सरकारी रास्ता नहीं बना है। बच्चों को लगभग सौ मीटर तक खेतों की मेड़ों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। रैथा गांव में प्राथमिक विद्यालय जाने वाली सड़क लंबे समय से कीचड़ और पानी से भरी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के बाद से यह सड़क दलदल में तब्दील हो गई है, परंतु मरम्मत की कोई पहल नहीं हुई।
वहीं महुरा गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय तक जाने के लिए लगभग 100 मीटर तक पगडंडी से होकर बच्चों को स्कूल पहुंचना पड़ता है। इसी तरह, बरहनी विकासखंड के सबल जलालपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत रहपुरी गांव से जलालपुर प्राथमिक विद्यालय जाने वाला रास्ता भी वर्षों से कीचड़युक्त और कच्चा बना हुआ है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से विद्यालय मार्गों की तत्काल मरम्मत कर पक्की सड़क बनवाने की मांग की है।
खेतों से होकर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
बरहनी ब्लॉक के रहपुरी गांव से जलालपुर प्राथमिक विद्यालय तक जाने वाला मार्ग भी पूरी तरह कच्चा और कीचड़युक्त है। बरसात में यह रास्ता जलमग्न हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या है, पर शासन-प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
सरौली और पट्टी गांव में हाल बदतर
टांडाकला क्षेत्र के सरौली ग्राम सभा में कंपोजिट विद्यालय तक कोई पक्का रास्ता नहीं है। बच्चे और शिक्षक दोनों ही दूसरों के खेतों से होकर विद्यालय जाते हैं। बरसात में रास्ता कीचड़ से भर जाता है। अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जल्द पक्का मार्ग बनाया जाए।
इसी क्षेत्र के पट्टी गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में चहारदीवारी के अंदर ही जलभराव रहता है। बच्चे मैदान में खेलने के बजाय कक्षा में ही प्रार्थना करने को विवश हैं।
हरिणका विद्यालय जर्जर, हैंडपंप खराब
बरहनी ब्लॉक के हरिणका गांव के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। दोनों विद्यालयों के लिए केवल एक शौचालय है और पेयजल के लिए लगा हैंडपंप खराब पड़ा है। बच्चे खेतों की मेड़ों से गुजरते समय गिर जाते हैं। ग्राम प्रधान का कहना है कि विद्यालय जाने के लिए छोड़ा गया चकमार्ग दबंगों के कब्जे में है और शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप है।