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पशु आश्रय स्थलों में नहीं है इंतजाम, लू के थपेड़े खा रहे बेजुबान

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पीडीडीयू नगर। जिले में पशु आश्रय केंद्रों की बदहाली दूर नहीं हो रही हैं। भीषण गर्मी पड़ रही है लेकिन पशु आश्रय स्थलों में पर्याप्त इंतजाम नहीं है। सूखे भूसे के भरोसे बेजुबान पशु हैं। अधिकतर पशु आश्रय स्थलों में छांव तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में दोपहर में मवेशी लू के थपेड़े खाने को विवश हैं। छुट्टा पशुओं को रखने के लिए कठौड़ी, पीडीडीयू नगर, चकिया, शिकारगंज, नौगढ़, चंदौली, चहनियां, धानापुर सहित 17 स्थानों पर अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं। पशु आश्रय स्थलों में दो हजार से अधिक पशु रखे गए हैं। लगभग सभी पशु आश्रय केंद्रों पर पशुओं की हालत खराब है।
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कठौड़ी स्थित जिला स्तरीय पशु आश्रय स्थल में कुल 230 पशु है। पशुओं को पानी पिलाने के लिए टैंक बनाया गया हैं। इसमें सबमर्सिबल पंप लगाया गया है। चार माह पूर्व में खंड विकास अधिकारी ज्वाला यादव ने निरीक्षण के बाद चरन के समीप पानी के लिए नाद व जगह जगह प्लास्टिक का ड्रम काटकर रखा गया। बावजूद इसके समय से पानी नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है। चकिया/शिकारगंज के स्थानीय राजकीय पशु चिकित्सालय परिसर स्थित बेसहारा पशु आश्रय केंद्र में सोमवार को 88 मवेशी रहे। आश्रय केंद्र में बनाए गए सीमेंट के चादर से छांव की व्यवस्था की गई है। कड़ी धूप के कारण पशुओं को तापमान का असर पहुंच रहा है। पशु पेड़ों की छांव में शरण लेने को मजबूर हैं। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी भारती ने बताया कि पशु पालकों मांग पर 88 पशुओं को 22 पशुपालकों के जिम्मे सौंपा गया है। इसके लिए 30 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन की दर से उन्हें दिया जाता है। शिकारगंज क्षेत्र के फिरोजपुर ग्राम पंचायत स्थित बनाए गए पशु आश्रय केंद्र में 42 पशु हैं। डॉ. आर पी भारती ने बताया कि पक्का मकान न होने से पशुओं में तापमान का असर पड़ता है। संवाद
खुले आसमान के नीचे बैठे रहते हैं पशु
धानापुर। क्षेत्र के नोनारी मे पशु आश्रय केंद्र की स्थिति बदहाल है। गोबर के ढेर के बीच पशु रहने को मजबूर हैं। वहीं सोमवार की दोपहर पशुओं की चरनी खाली दिखाई दी। पशु आश्रय केंद्र नोनारी मे 154 पशु हैं। जिनके रहने के लिए पशु आश्रय केंद्र में मात्र दो टीन शेड लगाया गया है। जिसकी वजह से ज्यादा समय तक पशु बाहर ही रहते हैं। सोमवार को भी पशु बाहर ही बैठे दिखे। जिसकी वजह से अक्सर पशुओं की मौत हो जाती है। केंद्र पर गोबर लकड़ी और गमला बनाने वाले मशीने भी बंद हैं। सेक्रेटरी महेन्द्र राम ने कहा कि संयंत्र की सुविधा होते ही गोबर की समस्या खत्म हो जाएगी। सेक्रेटरी विनोद सेठ ने कहा कि नेकनामपुर स्थायी पशु आश्रय की चहारदीवारी के लिए आवेदन किया जा चुका है।
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सूखे भूसे के सहारे जी रहे बेजुबान
ताराजीवनपुर। अलीनगर पानी टंकी में बने आश्रय केंद्र में पशुओं को धूप और लू से बचने के समुचित उपाय नहीं किए गए हैं। वही सूखे चारे के सहारे और गंदगी के बीच पशुओं को रखा गया है। वही पटपरा गौशाला में कुल 37 पशु हैं । यहां भी पशुओं को सूखे चारे के सहारे रखा गया है। जबकि हरा चारा की बुवाई की गई है ।लेकिन पशुओं को नसीब नहीं हो पा रहा है। कमोबेश यही हालात ककरही कला गौशाला पर रखे गए 35 पशुओं की बनी हुई है। हालांकि यहां लू से बचने के लिए बाउंड्री वॉल कराया जा रहा है। लेकिन बिजली के अभाव के कारण हैंडपंप में समरसेबल नहीं लग पा रहा है। जिससे पर्याप्त मात्रा में पानी की पशुओं के लिए समस्या बनी हुई है। राजकीय पशु चिकित्सालय सदलपुरा के प्रभारी डॉ सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि लू और धूप से बचने के लिए तिरपाल की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पीने की पानी की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके वैश्य ने बताया कि पशु आश्रय केंद्र पर जो दुर्व्यवस्थाएं हैं उन्हें दूर करने के लिए योजनाएं प्रस्तावित हैं। एमएलसी चुनाव के बाद तीव्र गति से काम लगेगा और पशु आश्रय केंद्रों की स्थिति सुधर जाएगी। नोनारी पशु आश्रय केंद्र पर बाउंड्री आदि बनाने की योजना भी है।जिसे पशुओं को दिक्कत नहीं होगी।
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