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जर्जर तारों और खंभों पर टिका विभाग का भरोसा

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जनपद में जर्जर हो चुके बिजली के तार और खंभे खतरा बने हुए हैं। इससे शार्ट सर्किट के साथ ही हादसे भी होते है। इनको बदलने के लिए शासन की ओर से कई बार योजनाएं बनाई गईं लेकिन अब तक उनपर अमल नहीं हो सका है। योजना की स्वीकृति मिलने के बाद भी नगरीय व ग्रामीण इलाकों में जर्जर खंभे और तार नहीं बदले गए हैं। बिजली विभाग का अभी भी जर्जर तारों और खंभों पर ही भरोसा टिका है।
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जिले में जर्जर तारों और खंभों को बदलने के लिए दो बार योजना बनाई गई। योजना को स्वीकृति भी मिली, कार्य भी आरंभ हुआ पर किन्हीं कारणों से कार्य बंद कर दिया गया है। अब विभाग ने शासन के पास करीब 80 करोड़ रुपये की नई कार्ययोजना भेजी है। कार्ययोजना को स्वीकृति मिलने के बाद शासन स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
बिजली के जर्जर तारों के टूटने व क्षतिग्रस्त खंभों के गिरने से आ दिन दुर्घटना होती रहती है। इससे बचने के लिए 2021 में जिले के 566 गांवों व मजरों में जर्जर एलटी तारों की जगह एबीसी (एरियल बंच कंडक्टर) तार लगाने की योजना को शासन से स्वीकृति मिली थी। इसके बाद कार्यदायी संस्थाओं ने सर्वे पूरा कर लिया और बरहनी ब्लॉक से तारों को बदलने का काम शुरू कर दिया गया। कुछ दिन काम चलने के बाद इसे बंद कर दिया गया है। वहीं शहरी इलाकों में तारों को बदलने के लिए मुगलसराय विद्युत वितरण उपखंड की ओर से एक करोड़ पांच लाख रुपये की कार्ययोजना को स्वीकृति मिली थी। इसके बाद अलीनगर क्षेत्र में टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर जर्जर तारों को बदलना शुरू किया गया लकिन बंद कर दिया गया। इसके बाद विभाग की ओर से जिले के सभी जर्जर तारों को बदलने के लिए करीब 80 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी गई है। योजना की स्वीकृति के बाद शासन स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तारों को बदला जाएगा। तब तक लोगों को सिर के ऊपर से गुजर रहे मौत के साये में जिंदगी गुजारनी पड़ेगी।
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आधे गांव में ही लगा एबीसी केबल
विभागीय लापरवाही व खामियों के चलते मनकपड़ा गांव में जर्जर तारों के टूटने की वजह से आए दिन विद्युत सप्लाई में बाधा हो रही है। आधे गांव में केबल लगाने के बाद काम बंद हो गया। गांव के पश्चिमी छोर पर दर्जनों कनेक्शनधारक पुराने तार में कंटिया लगाकर अपना कनेक्शन किए हुए हैं। एसडीओ अनिल सिंह ने कहा कि शीघ्र ही एबीसी केबल से उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिया जाएगा।
जर्जर तारों व खंभों से दुर्घटना की आशंका
नियामताबाद। विकासखंड के बिलारीडीह स्थित सब स्टेशन से भरछा, नियामताबाद, बुधवार, सिरसी आदि गांवों में विगत 40 वर्षों से जर्जर तारों व खंभों से बिजली की आपूर्ति की जा रही है। भरछा गांव में खंभे कमजोर व तार जर्जर हो गए हैं। नियामताबाद में पुराने हो चुके लोहे के खंभे नीचे से गल गए हैं। दुर्घटना से बचने के लिए ग्रामीण चंदा एकत्र कर लगभग आधा दर्जन खंभों के निचले हिस्से की सिमेंट से ढ़लाई करा चुके हैं। वहीं गांव आने वाले 11 हजार वोल्ट के खंभे भी पुराने हैं जो नीचे जंग खाकर कमजोर हो गए हैं। नियामताबाद ताल से पांडेयपुर जाने वाले लगभग डेढ किलोमीटर तार भी खतरे का कारण बन गए हैं। बियार बस्ती में आज भी लोग बांस व बल्ली के सहारे बिजली जला रहे हैं। वहीं कंदवा और ताराजीवनपुर क्षेत्र के तारापुर, डिग्घी, धनिका, रूपेठा, चांदपुर सहित दर्जनों गांव में अभी तक कई दशक पूर्व लगे लकड़ी के खंभे व जर्जर तारों के सहारे विद्युत आपूर्ति की जा रही है।
पांच वर्षों से नहीं बदले गए तार
धानापुर। स्थानीय विद्युत उपकेंद्र अंतर्गत विद्युत सप्लाई पुराने व जर्जर तारो के माध्यम से की जा रही है। जो पिछले कई वर्षों से लेकर आज तक बदले नही गए। क्षेत्र के धानापुर, शहीदगांव, श्रीकांतपुर, डेढ़वलियां, कुसुम्ही, सिहावल, नरौली, रायपुर, नौघरा, बुद्धपुर, हिंगुतरगढ़, बभनियावं, जगदीशपुर,नौली आदि गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि बीते पांच सालों मे कोई भी विद्युत तार बदले नहीं गए है। तार आए दिन टूट कर गिर जाते है। जिनकी चपेट मे आने से दो दर्जन से अधिक पशुओ की मौत हो हो चुकी है। जेई घनश्याम ने कहा कि अभी हम लोगों को विद्युत तारो को बदलने की कोई सूचना नही मिली है। न हीं हमारे यहां तार उपलब्ध है।
आधा अधूरा नंगा तार के जगह केवल लगाने का कार्य
शिकारगंज। स्थानीय क्षेत्र के जागेश्वरनाथ विद्युत उपकेंद्र से संचालित 5 फीडरों के गांव में एबीसी केबल लगाने का कार्य आधा अधूरा लटका है। क्षेत्र के बोदलपुर मुड़हुआ दक्षिणी कुसहीं करवादिया गायघाट जीयनपुरा सहामदपुर सुरथापुर अलीपुर भगड़ा लठिया कला अमरा दक्षिणी में अभी नंगे तारों से करंट दौड़ रहा है। नंगा तार टूटने के कारण पशुपालकों के पशु या ग्रामीण चपेट में आकर मौत हो चुकी है। उपखंड अधिकारी अनिल सिंह ने बताया कि एबीसी केवल बदलने का
जिले के जर्जर तारों और खंभों को बदलने के लिए कार्य योजना बनाकर शासन को भेज दी गई है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर के बाद इस दिशा में कार्य किया जाएगा। - एके श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, चंदौली
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