सकलडीहा। सच्ची निष्ठा व विश्वास हो तो भगवान के रूप में इंसान जरूर मिल जाते है। कुछ ऐसा ही बरठी गांव निवासी संदीप कुमार के बेटे यश कुमार के साथ हुआ। वह दो महीने से पेट की गंभीर बीमारी से पीड़ित और परेशान था। पैसे के अभाव में बेटे की जीवन के लिये दर दर भटक रहा था। लेकिन रविवार को सोशल मीडिया पर खबर पढ़कर डाफी स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक डा केएन पांडेय ने निशुल्क इलाज के लिये एंबुलेंस से बच्चे को हॉस्पिटल ले गये।
बरठी गांव निवासी संदीप कुमार ध्रुव बीते दो माह से अपने पांच वर्षीय बेटे यश कुमार के पेट की गंभीर बीमारी को लेकर मंदिर-मस्जिद से लेकर सरकारी अस्पताल तक इलाज के लिये दर दर भटक रहा था। प्रधानमंत्री आयुष्मान जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डेन कार्ड होने के बाद भी इलाज नहीं हो पा रहा था। शनिवार की शाम हालत खराब होने पर पिता संदीप अपने बच्चे को लेकर बीएचयू अस्पताल गए। संदीप के अनुसार वह बीएचयू अस्पताल के इमरजेंसी वह चिकित्सकों से गुहार लगाता रहा। आयुष्मान का कार्ड भी दिखाया लेकिन किसी ने नहीं सुनी। चिकित्सक प्रतिदिन पांच हजार रुपये का खर्च बताकर भर्ती करने की बात कर रहे थे। पूरी रात गुहार लगाने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो वह थकहाकर रविवार की सुबह बच्चे को लेकर घर आ गया। इस दौरान इसकी जानकारी उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों को हुई। तब कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों ने बच्चे के सहयोग की भावना से उपजा सकलडीहा की ओर से आर्थिक मदद के साथ सोशल मीडिया पर सहयोग की अपील की। सोशल मीडिया पर खबर पढ़ते ही डाफी स्थित निजी अस्पताल के निदेशक डा केएन पांडेय ने बच्चे का निशुल्क इलाज के लिए रविवार की दोपहर एंबुलेंस से हॉस्पिटल ले गये। वहां बच्चे का इलाज शुरू हो गया है। इस मौके पर हॉस्पिटल के प्रबंधक एसएन पांडेय, अनुपम चौबे, रितेश खरवार, अजय पटेल, विनोद, पवन मिश्रा आदि मौजूद रहे।