राजदरी। जंगलों से घिरे हिनौत घाट गांव के लोग आज भी पगडंडियों से होकर आते-जाते हैं, कई बार तो बांध के पानी से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी गांव के बच्चों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ती है।
नौगढ़ विकास खंड के जय मोहनी पोस्ता ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला यह गांव वर्षों से उदासीनता का शिकार है। नक्सली हमले को 21 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं बन पाया। हर साल बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है । कई बार अधिकारी गांव का दौरा कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ है। गांव के ग्रामीण प्यारेलाल गुप्ता लालचंद रामदुलारे खोल मुन्ना ने बताया कि यहां योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है।
बरसात के दिनों में हम गांव से बाहर नहीं जा पाते है। बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते और बुजुर्ग इलाज के लिए भी नहीं निकल सकते। पानी इतना भर जाता है कि खतरे का डर बना रहता है।
सरकारी योजनाओं की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन यहां विकास की कोई किरण नहीं दिखती। बारिश में गांव का रास्ता पूरी तरह डूब जाता है। कई बार लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं।
अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सभी को समस्या बताई गई, पर आज तक कुछ नहीं हुआ। जब चुनाव आते हैं तब वादे किए जाते हैं, बाकी वक्त कोई देखने नहीं आता।
बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए हम रोज़ पानी में उतरते हैं। महिलाओं और वृद्धों के लिए यह बहुत खतरनाक है। हमें डर रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए।
हिनौत घाट गांव किस ग्राम पंचायत में है इसकी जानकारी नहीं है। अगर इस तरीके की समस्या है तो इसका पता करवाने के बाद बहुत जल्द ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।अमित कुमार, बीडीओ, नौगढ़