लंबे अरसे के बाद धानापुर इलाके में आम के पेड़ों में बौर आया है। इसे देखकर किसान ही नहीं आम लोग भी खुश दिख रहे हैं। लगातार प्रकृति के कोप के शिकार हो रहे किसानों को इस बार अच्छी आम की फसल की उम्मीद है।
उनका मानना है कि इस बार कुद हद तक नुकसान की भरपाई होगी। वहीं अच्दी फसल होने से इस बार लोग आम का स्वाद जी भर कर उठा सकेेंगे।
वैसे तो वसंत के मौसम में आम का बौर लगते हैं और सरस्वती पूजा पर इसे भी चढ़ाया जाता है। पिछले वर्ष फरवरी माह में आंधी और बारिश की वजह से आम के बौर झड़ गए थे और फसल के उत्पादन पर असर पड़ा था।
यही नहीं गेहूं की फसल भी चौपट हो गई थी। इसके बाद किसानों को आशा थी कि धान की फसल से प्रकृति के कोप से हुए नुकसान की भरपाई होगी लेकिन सूखे की वजह से धान की फसल भी बर्बाद हो गई।
वर्षों बाद आम के पेड़ों को बौर से लदा देखा जा रहा है। क्षेत्र के कलमी आमों (चौसा, दशहरी, लंगड़ा) के अलावा देशी आम की डालें बौर से लकदक हैं।
वैसे यदि मौसम की मेहरबानी बरकरार रही तो इस वर्ष आम की फसल ग्रामीण क्षेत्र के लिए 'आम' बन जाएगी। तीन दशक पहले की तर्ज पर लगे आम के बौर को एक माह की खुराक माना जा रहा है।
बाग के मालिकों द्वारा अपने कलमी आमों पर दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। हालांकि किसान आम की फसल के बचाव के लिए मौसम के मेहरबान रहने की दुआ कर रहे हैं।
क्षेत्र के नौधरा, बुद्धपुर, हिंगुतरगढ, प्रसहटा, दीयां, सहेपुर आदि गांव के किसानों ने भारी मात्रा में कलमी आम चौसा, लगड़ा, सफेदा, दशहरी, सेंदुरवा, फजली, सुंदरी आदि को लगाया है।
किसानों का कहना है कि यदि आंधी, तूफान, पुरवा हवा से लगने वाले लासा से बचा रहा तो आम की रिकार्ड पैदावार होगी।