शहाबगंज। चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही बृहस्पतिवार को तब सामने आई जब सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति का स्थानीय पीएचसी में स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरू कर दिया गया। मरीज के परिजनों का आरोप है कि हालत गंभीर होने के बाद भी उसे भर्ती नहीं किया गया और रात में परिसर में ही स्ट्रेचर पर छोड़कर सभी स्वास्थ्यकर्मी घर चले गए। अगले दिन शुक्रवार को सुबह जब डाक्टर आए तो मरीज को चकिया रेफर किया गया।
कलानी गांव निवासी नंदा सिंह (42) बृहस्पतिवार को बीज लेकर इलिया से साइकिल से घर लौट रहे थे। रात में किसी वाहन से धक्का लग गया और वे वहीं गिर गये। गश्त पर निकली पुलिस ने इलाज के लिए उन्हें स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया। उनकी आंख व हाथ पर चोट आई थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उन्हें भर्ती करने की बजाए स्वास्थ्य कर्मियों ने स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरू कर दिया। स्वास्थ्य कर्मी ड्रिप लगाकर अपने आवास पर चले गए। वहीं चिकित्सक भी कोरोना का बहाना बनाकर चले गए। घंटों खुले आसमान के नीचे तड़पते रहे। शुक्रवार की सुबह ग्रामीणों के हो-हल्ला मचाने के बाद स्वास्थ्य कर्मी उन्हें वार्ड में ले गए। ग्राम प्रधान कुलदीप सिंह की जानकारी पर परिजन भी अस्पताल पहुंच गए थे। शुक्रवार को सुबह अस्पताल खुलने पर पहुंचे चिकित्सकों ने हालत गंभीर देख उन्हें जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया रेफर कर दिया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. संजय ने कहा कि मरीज का इलाज किया गया है। कर्मचारियों की कमी से कुछ समस्या हो रही है। वहीं सीएमओ डा. आरके मिश्र ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे आकस्मिक चिकित्सा सेवा प्रदान की जाती है। इसमें लापरवाही क्षम्य नहीं है। स्ट्रेचर पर इलाज व ड्रिप चढ़ाकर छोड़ देने की शिकायत मिली है। जांच कराकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।