टांडाकला में तैयार हो रही धान की फसल। संवाद
- फोटो : दिलोना बाइपास से अयोध्या जाने वाले वाहनो को डायवर्जन करवाती पुलिस।
समय से पहले इस साल मार्च में ही तपिश और बढ़ते तापमान के कारण गेहूं की खड़ी फसल सूखने लगी है। इससे किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई है। क्षेत्र के किसान इंद्रजीत पांडेय ने बताया कि गेहूं की फसल को पकने के लिए लंबे समय तक हल्की ठंड और नमी की आवश्यकता होती है। अनुकूल मौसम में गेहूं के दाने मोटे और वजनदार होते हैं जिससे पैदावार अच्छी मिलती है । इस बार ठंड का मौसम एकाएक विदा हो गया और तेज धूप ने फसलों को झुलसाना शुरू कर दिया है।
किसानों की चिंता यह है कि गेहूं की बालियां तो निकल आई हैं लेकिन धूप तेज होने से बालियां अंदर से सूख रही हैं। दाने छोटे और सिकुड़े हुए होने से इनका वजन कम हो जाएगा। फसल कटने पर दाने के बजाय केवल भूसा हाथ लगने की आशंका है। पैदावार कम होने से किसानों के सामने परिवार का भरण-पोषण करने की चुनौती खड़ी हो गई है। महमदपुर के किसान प्रदीप यादव ने बताया कि फसल को सूखने से बचाने के लिए उन्होंने पानी तो दिया लेकिन बालियों के भार और हल्की हवा के चलते पूरी फसल खेत में बिछ (लोट) गई।
कृषि विभाग के सहायक तकनीकी प्रबंधक (चहनिया) नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल की सिंचाई नहीं करनी चाहिए। जो सिंचाई करेंगे उनकी फसल सूखने लगेगी। सूखे खेतों में पानी भरने से सूर्य के तपन के साथ खेतों से भी गर्मी निकल रही है। इससे गेहूं तपन सहन नहीं कर पा रहा है। इससे बचने के लिए किसान केवल नमी वाले खेतों में सिंचाई कर सकते हैं।