कंदवा। गुरु वह है जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैला दे। गुरु अपने शिष्य को केवल ज्ञान ही नहीं देता बल्कि अपनी कृपा की छांव से उसके समस्त पापों का हरण भी कर लेता है। यह विचार मां भवानी प्राकट्य स्थल कसवढ़ डेहरियाडीह में बृहस्पतिवार को महंत चंद्रमौली मुनि उदासीन खड़ेश्वरी बाबा ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का महत्व बेहद अहम है। गुरु ही वह मागदर्शक होता है जो अपने शिष्य को सही व गलत में अंतर करना सिखाता है। कहा भगवान की लीला अपरंपार है। वह अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्यों व देवताओं को धर्म का आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस मनुष्य का चित्त स्थिर नहीं होता, वह अपनी इच्छाओं की पूर्ति में अपना सर्वस्व गवां बैठता है। न तो उसे जीवन में प्रभु का स्मरण हो पाता है और न ही सत्कर्मो में उसकी कोई भागीदारी होती है। इस मौके पर डॉ समर बहादुर सिंह, उमाकांत उपाध्याय, ज्ञानचंद्र सिंह, जयप्रकाश सिंह, विपिन उपाध्याय, मंगला सिंह, अजय सिंह आदि रहे। संवाद