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पितरों को किया पिंडदान

Sun, 18 Sep 2016 01:09 AM IST
chandauli
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बलुआ गंगा घाट पर शनिवार को पितरों को पिंडदान करता युवक। - फोटो : chandauli
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पितृपक्ष पर शनिवार को लोगों ने पितरों का तर्पण किया। घाट पर विधि विधान से पुरखों को अभिमंत्रित किया गया और पूजा अर्चना की गई। इसके बाद  पिंडदान कर सुख समृद्धि की कामना की गई। शनिवार को पितृपक्ष की शुरूआत हुई। जिले में बलुआ, गंगा घाट पर पिंडदान करने वालों की भीड़ रही। इसके साथ टांडा घाट, हसनपुर तिरगांवा, बड़गांवा, भुपौली, कैली, रौना, सहजौर सहित विभिन्न स्थानों पर पिंडदान के लिए लोग पहुुंचे। पुरोहितों के निर्देश पर पिंडकर्ता ने सिर के बाल मुड्वाए फिर तिल, जौ का आटा, खोआ, कुशा, जल आदि से पिंड निर्माण किया और पूजन अर्चन के बाद मंत्रोच्चार पूर्वक तर्पण किया। बाद में कौआ, गाय, चीटी आदि को भोजन दान किया और ब्राह्मण भोज कराया।
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ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग वाराणसी के पिशाच मोचन के साथ ही विभिन्न गंगा घाटों पर पहुंचे और तीर्थ पुरोहितों के निर्देश पर पिंडदान किया। वहीं बडी संख्या में लोग पिंड दान के लिए गया रवाना हुए। मान्यता है कि इंसान की मृत्यु के बाद भी आत्मा नहीं मरती और दूसरी दूनियां में रहती है। पितृपक्ष में आत्माएं धरती पर आती हैं। आश्विन मास के कृक्ष्ण पक्ष में पंद्रह दिनों तक पितरों के नाम से जलार्पण करने, पिंडदान करने से आत्माएं खुश होती है और वे आशीर्वाद देती हैं। पंद्रह दिनों तक शुभ कार्य बंद होते हैं और लोग पूरी तरह पितरों को याद करते हैं।
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