क्षेत्र के सिकंदरपुर शिव मंदिर परिसर पर जागृति सेवा समिति के नेतृत्व में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठवें दिन बुधवार शाम धनुष भंग और राम-सीता विवाह का प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना।
कथावाचक मानस मयूरी साध्वी शालिनी त्रिपाठी ने भक्ति और भगवान के मिलन के रूप में राम-सीता विवाह की व्याख्या की। धनुष यज्ञ का विशेष वर्णन करते हुए एक रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि धनुष टूटने पर जब उससे पूछा गया कि वह दुखी है या नहीं, तो धनुष ने कहा कि वह सबसे ज्यादा प्रसन्न है।
पहले वह दूसरों के कष्ट का कारण बनता था लेकिन अब टूटकर राम-सीता के मिलन का कारण बन गया है और उसने भगवान राम के चरणों में स्थान पाया है।