ठंडी हवा के झोंके ने ठिठुरन बढा दी है। गुरुवार को सुबह से शाम तक सूर्य के दर्शन नहीं हुए और कोहरे का असर रहा। बढ़ी ठंड की वजह से जनजीवन प्रभावित रहा। जबकि अलाव व रैन बसेरा भी बस नाम के ही रहे।
गुरुवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहा तो न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहा। दोपहर में दस किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चली। इससे लोगों की कंपकपी छूटी। वैसे तो नगर में 25 स्थानों पर अलाव जलाने का दावा किया गया है और दो स्थानों पर रैन बसेरा बने हैं, लेकिन हकीकत में कभी अलाव जलता नहीं दिखा। ठंड से बचने के लिए लोग कागज, दफ्ती, लकड़ी आदि चुन कर आग जलाते दिखे। नगर के रैन बसेरों की स्थिति यह है कि रेलवे के परमिशन के बगैर रेलवे स्टेशन के सामने बने रैन बसेरा में मात्र एक व्यक्ति बैठा मिला। टेंट में बने रैन बसेरा में ठंड से बचने के उपाय नाकाफी है, वहीं लाल बहादुर शास्त्री पार्क मे बने रैन बसेरा में 15 लोगों के ठहरने का इंतजाम किया गया हे लकिन प्रचार प्रसार के अभाव में यहां गुरुवार को एक भी व्यक्ति नहीं मिला। पिछले तीन दिनों से प्रतिदिन एक व्यक्ति यहां दो से तीन घंटे समय गुजारा है। ठंड को देखते हुए स्कूलों को एक जनवरी तक बंद कर दिया गया है। ऐसे में बच्चों को राहत मिली है। ठंड की वजह से बीमारों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शिकारगंज संवाददाता के अनुसारक्षेत्र में हवा चलने से गलन में काफी इजाफा रहा तथा कोहरे से भी लोगो को परेशानी उठानी पड़ी।
ठंड से बचाव के लिए लोगों द्वारा तरह-तरह के उपाय किए गए। इससे बचने के लिए एक तरफ जहां लोग पूरे शरीर को गर्म कपड़े से ढक कर रख रहे थे। वहीं राहत के लिए पुआव के अलाव का भी सहारा लिया जा रहा था। शिकारगंज ग्राम प्रधान अनिता शर्मा, बलिया कलां ग्राम प्रधान बंशीधर चैहान, बलिया खुर्द प्रधान दिनेष कुशवाहा, हेतिमपुर प्रधान रामविलास पाल, पुरानाडीह प्रधान धर्मेन्द्र यादव, बोदलपुर प्रधान प्रदीप वनवासी, नोडिहा प्रधान विनोद कुमार, कुशही रणजीत यादव, जोगिया कलां चंदा देवी, नेवाजगंज प्रधान जर्नादन सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत में अलाव जलाने के लिए सरकारी तौर पर कोई आदेश-निर्देश नही मिला हैं।
इस संबंध में तहसीलदार राकेश कुमार सिंह ने कहा कि क्षेत्र में अलाव जलाने के लिए चट्टी-चैराहो पर क्षेत्रीय लेखपालों को लगाया गया है।