पीडीडीयू नगर। प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी के लिए चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेन दूसरे दिन राजकोट में फंसे 12 सौ से अधिक मजदूरों को लेकर पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर पहुंची। दोपहर बाद पहुंचे ट्रेन से उतरे श्रमिकों को रोडवेज की 50 बसों से उनके गृह जनपद पहुंचाया गया। इस दौरान स्टेशन पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।
देश में लागू लॉकडाउन में विभिन्न औद्योगिक शहरों में फंसे श्रमिकों की घर वापसी के लिए एक मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जा रहा है।
एक मई से गृह मंत्रालय के निर्देश पर श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से श्रमिकों को घर वापस भेजा जा रहा है। प्रदेश सरकार की पहल के बाद प्रदेश के चंदौली सहित आजमगढ़, गोरखपुर, गाजीपुर, जौनपुर, बलिया, भदोही, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बस्ती, मउ, मिर्जापुर, सोनभद्र, कुशीनगर स िहत विभिन्न जनपदों के 1200 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेन से शनिवार को दोपहर तीन बजे पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंची। ट्रेन पहुंचने के पहले ही प्रशासन की ओर से इंतजाम कर लिए गए थे। श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए 50 बसें सर्कुलेटिंग एरिया में खड़ी कर दी गई। प्लेटफार्म पर यात्रियों को खड़ा होने के लिए गोल घेरा बनाया गया। हालांकि स्टेशन पर पत्रकारों को जाने से रोक दिया गया। टिकट काउंटर पर जिले के नाम लिखकर चिपकाए गए। शाम तीन बजे ट्रेन के पहुंचते ही एक एक बोगी से बारी बारी से यात्रियों को नीचे उतारा गया। इसके बाद थर्मल स्क्रीनिंग के बाद एआरएम मुकेश कुमार सिंह और रामवृक्ष की देख रेेख में सभी को निर्धारित बसों में भेजा गया। श्रमिकों के घर भेजने का सिलसिला रात आठ बजे तक चलता रहा।
लॉकडाउन जिंदगी का सबसे खराब अनुभव
पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते देश में लागू लॉकडाउन हमारा सबसे खराब अनुभव रहा है। घर में कैद होकर डेढ़ माह का समय कैसे बीता हमारा दिल ही जानता है। घर तो पहुंच गए अब आगे की जिंदगी भगवान भरोसे है। ये बातें 20 घंटे का सफर तय कर पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर पहुंचे श्रमिकों ने कहीं।
अपनी पति राजेश यादव और दूधमुंहे बच्चे के साथ स्टेशन पर पहुंची कुशीनगर निवासी रेशमा यादव ने कहा कि पति फैक्टरी में काम करते थे। कोरोना के चलते लॉकडाउन में फैक्टरी बंद हो गई। कुछ दिन तो काम चला लेकिन दूसरे लॉकडाउन में पैसे खत्म हो गये और परेशानी होने लगी। किसी तरह यहां पहुंची तो जान में जान आई। मऊ निवासी मुलायम यादव ने कहा कि योगी सरकार ने समय से अच्छा कदम उठाया है। कहा कि वहां फैक्टरी में काम करता था। घर पर भी पैसे भेजता था लेकिन दो माह में दो बार घर से पैसे मंगाने की नौबत आ गई। लौटने के बाद अब क्या करेंगे पूछने पर कहा कि उपर वाले के भरोसे हैं। संत कबीर नगर निवासी विशाल चौधरी ने कहा कि जैसे ही पता चला कि श्रमिकों के लिए स्पेशल ट्रेन चल रही है। ऑनलाइन फार्म भरा और घर वापसी की। वहां रहता तो पता नहीं क्या होता। मनिहार गाजीपुर निवासी रविकांत ने बताया कि सुना था कि प्रदेश सरकार मजदूरों को फ्री में पहुंचाएगी लेकिन हमसे अधिक पैसे वसूले गए। किराए के नाम पर नौ सौ रुपये लिया गया जबकि टिकट 685 रुपये के दिए गए। रास्ते में सिर्फ एक बार खाना और दो बार पानी दिया गया। आंबेडकर नगर निवासी संजय ने बताया कि लॉकडाउन ने अचानक हमारी किस्मत बदल दी है। किसी तरह सरजमीं पर तो पहुंच गए आगे के भविष्य की चिंता है।
लॉकडाउन का पालन कराने वाले ही भूले सोशल डिस्टेंसिंग
पीडीडीयू नगर। श्रमिकों की घर वापसी के लिए जिला प्रशासन और रेलवे पूरी तरह सतर्कता बरत रही है। यही कारण है कि रेलवे स्टेशन पर कई थानों की फोर्स तैनात की गई स्टेशन पर लॉकडाउन का पालन कराने के लिए पहुंचे पुलिस कर्मी, अधिकारी स्वयं सोशल डिस्टेंसिंग को भूल गए।
सुबह से बस चालक और परिचालक स्टेशन पर पहुंच गए। टिकट काउंटर के पास सभी चालक परिचालक एक दूसरे से सटकर बैठे रहे। इसी तरह पुलिसकर्मी भी यात्रियों के बैठने के बने कुर्सियों पर ठंसे रहे और एक दूसरे से चिपके रहे। अस्पताल की तरफ से आए हैंडग्लब्स, मास्क, हेडकवर, सैनिटाइजर आदि लेने में पीछे नहीं रहे। चिकित्सकों से मांग मांग कर सुरक्षा उपकरण लेकर फिर से एक दूसरे से चिपक कर बैठ गए। यही नहीं पुलिस के अधिकारी भी एक दूसरे से हाथ मिलाने, सटकर बातें करने से पीछे नहीं रहे।
भूखे प्यासे बैठे रहे बस चालक और पुलिसकर्मी
पीडीडीयू नगर। श्रमिकों की घर वापसी में सबसे अधिक परेशान बस चालक, परिचालक और पुलिस के कांस्टेबल हो रहे हैं। बस चालकों को सुबह से ही सूचना दे दी गई कि वे बसों को लेकर स्टेशन पर पहुंचे। चालक स्टेशन पर पहुंच भी गए लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि ट्रेन कब आएगी। ऐसे में वे घंटों स्टेशन पर बैठकर समय काटते रहे।
कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान लागू लॉकडाउन के तीसरे चरण में जिले की सीमा में आधे सवारियों के साथ बसों को चलाने की छूट मिल गई है। इससे चालकों को कुछ राहत मिली थी। इस बीच श्रमिकों की घर वापसी शुरू हो गई। ऐसे में स्टेशन पर आए श्रमिकों को बसों से उनके घरों तक पहुंचाया जा रहा है। शुक्रवार के बाद शनिवार को भी गुजरात से श्रमिकों को लेकर ट्रेन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंची। यहां श्रमिकों को लेने के लिए बस चालकों को सुबह ही स्टेशन पर बुला लिया गया। ऐसे में दिन भर चालक परिचालक भूखे प्यासे बैठे रहे।