क्षेत्र के तारगांव, अजगरा स्थित ब्रह्म बाबा मंदिर परिसर के समीप रविवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा प्रारंभ हुई। कथावाचक व्यास आचार्य मनोज शास्त्री का डॉ. योगेंद्रनाथ ओझा ने तिलक लगाकर व अंगवस्त्र प्रदान पूजा की।
प्रथम दिन की कथा में आचार्य ने धुंधकारी की कथा सुनाई। कहा कि धुंधकारी नामक एक पिशाच ने अपने जीवन में बहुत ही क्रूर कर्म व पाप किए थे। इसकारण वह प्रेत योनि में भटक रहा था। ईश्वर की महिमा से गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया था। धुंधकारी भी प्रतिदिन भागवत कथा का श्रवण कर रहा था। कथा सुनने के कारण उसके पाप कट गए और उसको मुक्ति मिल गई। उसने फिर से मनुष्य जीवन प्राप्त कर लिया। कहा की भागवत ऐसी अमृत कथा है जिसके श्रवण मात्र से मनुष्य का पाप कट जाते हैं और उसका हृदय निर्मल हो जाता है। इस मौके पर कथा के आयोजक राजेश ओझा सहित बबलू ओझा, जयप्रकाश त्रिपाठी, डा. संजय त्रिपाठी, रमाशंकर ओझा, रविकांत ओझा मौजूद रहे। संवाद