हृदय के विकार को समाप्त करता है श्रीमद भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
चहनियां। क्षेत्र के महुअर कला में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा में जियर स्वामी महाराज ने भक्तों को भागवत कथा के महत्व को समझाया। कहा कि हम सभी को भगवान के अवतारों की कथा बार-बार सुननी चाहिए। भागवत कथा से हृदय का विकार समाप्त हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस घर में श्रीमद्भागवत की पूजा होती है। उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। हर घर में श्रीमद्भागवत की पूजा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक बार भोजन कर लेने से एक बार सांस ले लेने से काम नहीं चल सकता है। उसी प्रकार एक बार कथा सुनने से काम कैसे चल सकता है। कहा कि भागवत कथा से जीवन में शांति मिलती है। कहा कि जैसे वाल्मिकी ईश्वर का नाम जपते जपते गलत मार्गो से हटकर प्रशस्त मार्गों के अधिकारी बन गए। अंगुली माल डाकू गौतम बुद्ध के उपदेशों को सुन कर अहिंसा का पुजारी बन गया। कालिदास जी अपनी पत्नी की कृपा से जीवन को धन्य कर लिया। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। कर्म के महत्व को समझाते हुए कहा कि कर्म करते समय व्यक्ति को सतर्क रहने की आवश्यकता है। कर्म का फल अकाट्य होता है। इसका फल मिलना है मिलना निश्चित है। जो जैसा कर्म करेगा वैसा फल मिलेगा ही मिलेगा। महाराज ने मांसाहार का विरोध करते हुए कहा कि जीभ के स्वाद के लिए दूसरे जीवो को मारकर खाना दुर्भाग्यपूर्ण है। हर जीव को अपनी जिंदगी जीने का पूर्ण अधिकार है।
रिपोर्ट -छोटेलाल पांडेय
संपादन- कृष्ण मुरारी मिश्र
बाइट-1300