पीडीडीयू नगर। शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली के जर्जर खंभे और लटकती तारों की वजह से कभी भी बड़े हादसे हो सकते हैं। शिकायत के बाद भी बिजली विभाग इस समस्या का निदान नहीं कर रहा। इससे लोगों में दुर्घटना का भय बना रहता है।
जर्जर बिजली के खंभे और तार बदलने के लिए पिछले वर्ष जून में जिले के 566 ऐसे गांवों को चिह्नित किया गया था, जिनकी आबादी एक हजार या उससे अधिक है। यह काम बरहनी ब्लॉक के चयनित गांवों में शुरू भी कर दिया गया। इसके बाद शेष गांवों में अभी तक सर्वे ही चल रहा है। इन गांवों में जर्जर खंभों पर जगह-जगह तार लटक रहे हैं। शहरी इलाकों की गलियों में भी जर्जर खंभों के सहारे बिजली के तार दौड़ाए जा रहे हैं। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ताराजीवनपुर। क्षेत्र के रामपुर, डिग्घी, संघती, बसनी, रेवसा सहित आधा दर्जन गांवों में अभी भी जर्जर लकड़ी के पोल, बांस-बल्लियों व जर्जर तार के सहारे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। इससे आए दिन दुर्घटना होती रहती हैं। रामपुर गांव निवासी संतोष कुमार ने बताया कि खंभे व तार बदलने के लिए विभागीय अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत किए जाने के बाद भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। सदलपुरा गांव निवासी अजय सिंह ने बताया कि जर्जर विद्युत तार व खंभे बदलने के लिए शासन द्वारा धन प्रतिवर्ष आवंटन होता है लेकिन विभागीय अधिकारियों की मनमानी के कारण कार्य नहीं किया जाता है। गंजबसनी निवासी राजकुमार यादव ने बताया कि जर्जर विद्युत खंभे व गांव में लटकते तारों से आए दिन दुर्घटना होती है लेकिन इनको को बदला नहीं जा रहा है। संवाद
नियामताबाद। क्षेत्र के भरछा व बुधवार गांव में अभी भी कहीं बिजली के खंभे नहीं हैं तो कही तार जर्जर हो चुके हैं। बुधवार गांव में विद्युत विभाग ने जर्जर तारों को बदल तो दिया है लेकिन खंभे नहीं बदले गए हैं। गांव से सटे बिंदपुरवा गांव में बिंद व बियार समाज के करीब 20 घर हैं। इस गांव में भी जर्जर बांस-बल्ली के सहारे दौड़ रही है। ग्राम प्रधान रामभरोस बिंद ने कहा कि बस्ती में बिजली बांस बल्ली के सहारे दौड़ाई जा रही है। यहां खंभे की सख्त आवश्यकता है। इसी तरह भरछा गांव में अभी भी पुराने समय के लगे जर्जर तारों व खंभों के सहारे ही विद्युत आपूर्ति की जा रही है। संवाद
पड़ाव। स्थानीय चौराहे से रामनगर जाने वाले मार्ग पर लगभग आधा दर्जन खंभे जर्जर हो चुके हैं। सबसे खतरनाक स्थिति रामनगर ऑटो स्टैंड के समीप है। यहां बिजली का खंभा कभी भी धराशाई हो सकता है। वहीं सड़क के किनारे होने के कारण इन खंभों में आए दिन बड़े वाहनों से धक्का लग जाता है।इससे तारो के टूटकर गिरने और नीचे से जर्जर हो चुके खंभों के गिरने की आशंका बनी रहती है। जर्जर खंभों व तारों को बदलने के लिए कई बार स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग में शिकायत की पर अब तक जर्जर पोल व तार नहीं बदले जा सके हैं।संवाद
कंदवा। क्षेत्र के असना, कंजेहरा, बहोरा चंदेल, भदखरी और महुंजी गांव में विद्युत आपूर्ति बांस बल्ली, लकड़ी के खंभे और जर्जर तार के सहारे की जा रही है। असना गांव में तो तार इतने जर्जर हो गए हैं कि आए दिन टूट कर गिरते रहते हैं। जर्जर तार हादसों को न्योता दे रहे हैं। बावजूद इसके बिजली विभाग की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आ रहा है।जर्जर तार और बांस बल्ली और लकड़ी के टूटे खंभों के सहारे हो रही विद्युत आपूर्ति और बार-बार तार टूटने की घटना से इन गांवों के लोग दहशत के साये में रहने को विवश हैं। लोगों ने कई बार विभागीय अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन बिजली विभाग ने लकड़ी के टूटे खंभों एंव जर्जर तारों को बदलना मुनासिब नहीं समझा है। संवाद
जनपद में जर्जर तारों व खंभों को बदलने का कार्य चल रहा है। करीब सभी चयनित गांवों में सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। विधानसभा चुनाव के कारण कार्य की गति कुछ धीमी हुई थी। अब कार्यदाई संस्था को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दे दिए गए हैं। मनोज कुमार पाठक, अधीक्षण अभियंता, चंदौली।