डोमरी-सूजाबाद में गंगा से मिला शिवलिंग। संवाद
सूजाबाद-डोमरी क्षेत्र में 11 दिन बाद मंगलवार को गंगा में दूसरा शिवलिंग मिला। गया है। शिवलिंग की आकृति पहले मिले शिवलिंग से काफी हद तक मिलती-जुलती है। दोनों पर नाग की आकृतियां उकेरी गई हैं, हालांकि नया शिवलिंग आकार में अपेक्षाकृत छोटा है। क्षेत्र में चर्चा कि ये शिवलिंग गंगा में कहां से रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ लोगों का मानना है कि शिवलिंग किसी पुराने मंदिर या निर्माण स्थल से बहकर गंगा में पहुंचा होगा। शिवलिंग पर सफेद सीमेंट को देखकर लोग अंदाजा लगा रहे कि यह शिवलिंग किसी भवन या संरचना का हिस्सा हो सकता है।
5 जून को डोमरी वार्ड संख्या-48 स्थित गंगा तट पर मछुआरों के जाल में करीब दो क्विंटल का शिवलिंग मिला था। उस शिवलिंग को गंगा चबूतरा पर स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। तब से प्रतिदिन 500 से ज्यादा संख्या में श्रद्धालु वहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी बीच 16 जून को वहीं गंगा में दूसरा शिवलिंग मिला। रतनपुर निवासी अचेत कुमार ने बताया कि मंगलवार को गंगा स्नान के दौरान उनकी नजर गंगा में शिवलिंग पर पड़ी। उन्होंने बताया कि इसकी आकृति पहले मिले शिवलिंग से काफी मिलती है। उसे गंगा किनारे ही रखा गया है।
-प्रो.राणा पी.बी.सिंह, काशी की संस्कृति और भूगोल के विशेषज्ञ और पूर्व विभागाध्यक्ष, बीएचयू ने कहा कि तीन या उससे अधिक नाग वाले शिवलिंग को नागेश्वर शिवलिंग कहा जाता है। ऐसे शिवलिंग अत्यंत दुर्लभ माने जाते हैं। ये शिवलिंग काशी के ही हैं और गंगा घाट के किनारे के ही लगते हैं। संभव है कि काशी में किसी निर्माण के दौरान अन्य कारणों से इसे गंगा में विसर्जित या फेंक दिया गया हो।-
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