मुहर्रम की पहली तारीख पर मंगलवार को मिल्कियाना सादात बस्ती में कदमी मजलिस आयोजित हुई। इससे पूरे क्षेत्र में गम और एहतराम का माहौल दिखा। मजलिस या हुसैन की सदाएं गूंजीं। इसमें सिया समुदाय के साथ सभी समाज के लोग शामिल हुए। मजलिस में जाकिरों ने हजरत इमाम हुसैन के कर्बला आगमन और उनके संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। अल्हाज समर हसन हुसैनी ने कहा कि इमाम हुसैन ने अन्याय, अत्याचार और अनैतिकता के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने परिवार और साथियों के साथ कुर्बानी दी। उन्होंने बताया कि कर्बला का संदेश केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मजलिस के बाद अंजुमन सज्जादिया असगरिया के वरिष्ठ नौहाख्वां सैयद लाइक जाफरी ने अपने साथियों फैज मेहदी और दानिश जाफरी के साथ दर्द भरा नोहा पेश किया। नोहे को सुनकर उपस्थित अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं।