यहां चिकित्सकों ने इंद्रदेव और कालेन्द्र को मृत घोषित कर दिया। कालेन्द्र की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। कालेंद्र बड़ी बहन के बाद तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। अभी उसकी शादी नहीं हुई थी।
उसकी मौत से माता सीता देवी, पिता चंद्रिका, बहन सहित अन्य भाइयों का रो-रोकर हाल बेहाल हो गया। परिवार वालों को ढांढस बंधाने वाले भी खुद को रोने से नहीं रोक सके। जवान बेटे को कंधा देने की मजबूरी में पिता चंद्रिका बार बार अचेतावस्था में पहुंच जा रहे थे।