धानापुर। पितृपक्ष के बाद अधिक मास (मलमास) की वजह से जिले में होने वाली ऐतिहासिक रामलीला टल गई है। कोरोना की वजह से रामलीला होना मुश्किल है। हालांकि अभी भी रामलीला कमेटियों का कहना है कि प्रशासन की इजाजत से रामलीला का आयोजन किया जाएगा। रामलीला की अनुमति नहीं मिलने पर वे रामायण पाठ कर परंपरा का निर्वाह करेंगे।
धानापुर में पिछले दो सौ वर्षों से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते सार्वजनिक पूजा और कार्यक्रमों पर रोक है। जिले में आम तौर पर रामलीला नवरात्रि के साथ शुरू होती है। इस वर्ष पितृपक्ष के समाप्ति के साथ ही अधिक मास की शुरूआत हो गई। 17 अक्तूबर से रामलीला की शुरूआत होगी। ऐसे में रामलीला कमेटी के सदस्य और कलाकार ऊहापोह में पड़े हैं। धानापुर रामलीला समिति के अध्यक्ष
अरविंद मिश्र ने बताया कि यहां दो सौ वर्षों से रामलीला हो रही है। इस वर्ष भी रामलीला की तैयारी पूरी हो चुकी है। प्रशासन के निर्देशों का इंतजार है। यदि रामलीला की मंजूरी मिलती है तो रामलीला होगी। यदि रामलीला की मंजूरी नहीं मिलती है तो राम चरित मानस का पाठ कर परंपरा निभाएंगे। व्यास कृष्णानंद मिश्र ने कहा कि वे दस वर्षों से व्यास की भूमिका में है। कहा कि इस वर्ष रामलीला न होने से अत्यधिक दुख होगा। ग्रामीण प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि रामलीला के आयोजन से आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति का ज्ञान होता है। इससे स्वस्थ मनोरंजन होता है। ऐसे में इस वर्ष आयोजन होने चाहिए। इसी तरह शिव कुमार द्विवेदी ने कहा यहां की रामलीला पूरे इलाके में प्रसिद्ध है। धनुष यज्ञ तो देखने के लिए कई गांवों से लोग आते हैं। रामलीला न होने पर ग्रामीण अत्यधिक दुख होगा।