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चकिया में रामकथा

Thu, 26 Mar 2015 01:34 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली
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वर्तमान दौर में राम जैसे पुत्र तथा सीता जैसी बहू की जरूरत है, ताकि समाज और परिवार को एक सूत्र में बांधा जा सके।
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यह उदगार स्थानीय मां काली मंदिर प्रांगण में देवरहा बाबा सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा के चौथी निशा को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश की भोपाल से पधारी विदुषी श्रीरामकथा वक्ता साध्वी प्रेमलता मिश्रा ने व्यक्त किए।


उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज और परिवार को जोड़ने की कड़ी हैं। इसी कड़ी को मजबूत करने के लिए महिलाओं की शिक्षा जरूरी है। उन्हाेंने कहा कि जो सास अपनी बहू को बेटी तथा जो बहू अपनी सास को मां समान नहीं समझती उसे राम चरितमानस की कथा सुनने का अधिकार नहीं है।
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उन्होंने कहा कि बेटियां पिता का भाग होती है। इन्हें भी बराबर का दर्जा मिला है। कथा के दौरान सुधाकर कुशवाहा, वीरबहादुर सिंह, विरेंद्र सिंह, मंगला राय, राजेश, अमरनाथ यादव, कैलाशनाथ द्विवेदी, विजयानंद द्विवेदी सहित तमाम श्रोता मौजूद थे।


भक्ति भाव से मिलते है भगवान: विभा उपाध्याय
शहाबगंज। भक्ति भाव से ही भगवान को प्राप्त किया जा सकता है।

भगवान श्रीराम हर जगह मौजूद है, बस जरूरत है मन से याद करने की। यह उद्गार क्षेत्र के राममाड़ो गांव स्थित मां शीतला मंदिर प्रांगण में चल रहे संगीतमय श्रीरामकथा के चौथे दिन मंगलवार को कथा वाचक विभा उपाध्याय ने व्यक्त किया।
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कहा कि कथा श्रवण मात्र से कुछ नहीं होने वाला है, बल्कि मन से कथा को श्रवण करना चाहिए और उसे व्यवहार में भी उतारने की जरूरत है। तभी जाकर कथा श्रवण का लाभ मिलता है। इस दौरान अनिल तिवारी, अशोक कुमार, रामहृदय तिवारी, ओमप्रकाश मिवारी, भोलानाथ चौहान, स्वामीनाथ सिंह और चंद्रमा विश्वकर्मा सहित दर्जनों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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