विकासखंड के कटरिया गांव स्थित राष्ट्रीय बिरहा अकादमी में शनिवार को बिरहा के प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इसमें बिरहा के क्षेत्रीय लोक गायकों व कवियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला।
बिरहा अकादमी के निदेशक व अंतर्राष्ट्रीय बिरहा गायक डॉ. मन्नू यादव ने कहा कि बिरहा के छंद विधान के प्रणेता कवि रामधारी सिंह की स्तुति को करीब 70 फीसदी बिरहा अखाड़ों में गाया जाता है। वे कवि के साथ गीतकार थे। उनकी रचनाओं को वीर रस के प्रसिद्ध गायक रामदेव, रामखेलावन पुजारी सहित तमाम गायक प्रस्तुत कर चुके हैं। पूर्वांचल व अन्य जगहों पर उन्हें पिंगल आचार्य के रूप में जाना जाता है। कहा कि वे अखाड़े के भेदभाव को भुलकर सभी को छंद, अलंकार, पिंगल शास्त्र की बारीकियां बताते थे। वे बिरहा जगत के संत कवि और गीतकार माने जाते हैं। आजीवन माधवी छंद, रूपमाला छंद, सारंगी छंद, करखा छंद आदि की रचना कर बिरहा जगत की मान बढ़ाते रहे। कहा कि बिरहा के संरक्षण से समूची संस्कृति का संरक्षण होता है। यह लोक व शास्त्र में सामंजस्य की विधा है। बिरहा मनोरंजन का साधन होने के साथ सामाजिक संदेश का वाहक भी होता है। इस मौके पर गायक अशोक कुमार, डॉ. विरंजय सिह, चरन सिंह, राजीव यादव, मितालू पांडेय, बबलू यादव, पूजा रानी, रामप्रताप, नवनीत पटेल, सुनील यादव रहे।