वनाधिकार कानून लागू करने व वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में गुरुवार की
दोपहर महिलाआें ने जुलूस निकाला और नारेबाजी करते हुए नौगढ़, चकिया तथा
सोनभद्र मार्ग को जाम कर दिया जिसके चलते चार घंटे तक आवागमन ठप रहा।
बाद
में थाना नौगढ़ पर प्रदर्शन कर नारेबाजी किया। इस दौरान उग्र महिलाओं ने
थाने के गेट को खोलकर अंदर जाने का भी प्रयास किया। नक्सल सीओ रामकृष्ण
मिश्र के उनकी मांगों को पूरा कराने तथा न्याय दिलाने के आश्वासन पर वापस
लौट गईं।
बताया जाता है कि जयमोहनी और मझगांई तथा नौगढ़ रेंज की वनभूमि
को कब्जा करके पेड़ों के काटने पर वन विभाग ने वनअपराध का केस दर्ज करके दो
दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जिसके विरोध में लामबंद हजारों
महिलाएं हाथों में लाठी, हंसिया और कुल्हाड़ी लेकर दुर्गा मंदिर पोखरे से
जुलूस और नारेबाजी करते हुए नौगढ़ थाने पर जमा हो गईं और नौगढ़ चकिया तथा
सोनभद्र मार्ग को जाम कर दिया। धरने का नेतृत्व कर रही महिला वनाधिकार
एक्शन कमेटी की रोमा सिंह ने कहा कि वनाधिकार कानून दबंग जमाखोरों के लिए
नहीं है।
अधिकारी कानून का किताब पढ़कर वनवासियों के साथ न्याय करें और
उन्हें कब्जा दिलाएं। कहा कि 62 वर्षों बाद सरकार ने अधिकार दिया जिसे मोदी
सरकार ने अध्यादेश लाकर बदल दिया है।
सरकार भूमि का अधिग्रहण करके
कंपनियों को बेच रही है। वन विभाग अंग्रेजी का सपूत है। महिलाओं ने कहा कि
माओवादी आंदोलन को यहां की वनवासी महिलाओं ने खत्म किया जो अब सब्र का बांध
टूटा तो रूकेगा नहीं। राज्य महिला आयोग की सदस्य बासमती कोल पर प्रहार
करते हुए कहा कि बासमती दबंगों का साथ दे रही हैं और महिलाओं का ही
उत्पीड़न कर रही हैं।
जिसे महिलाएं खुद दौड़ा कर हिसाब बराबर कर लेंगी।
फरवरी के अंतिम महीने में वनभूमि पर हम लोग तीर, धनुष व तलवार के साथ
जंगलों में वनाधिकार समिति का दफ्तर खोलेंगे और जन सुनवाई करेंगे। वक्ताओं
ने कहा कि यहां के लोग भूखे रहे हैं और अधिकारी नौगढ़ महोत्सव कराकर डांस
कर रहे हैं।