पीडीडीयू नगर। इन दिनों खाद्य पदार्थों व सब्जियों के लगातार बढ़ रहे मूल्य से लोगों के लिए घर का खर्च संभालना कठिन हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी दाल, तेल सब्जियों के भाव बढ़ने से हो रही है। वहीं रसोई गैस सिलिंडर का भाव भी बढ़कर नौ सौ रुपये हो गया है। इससे मध्यम व गरीब तबके के लोगों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई है।
पिछले कुछ दिनों से महंगाई बेलगाम हो गई है। डीजल व पेट्रोल सहित लगभग सभी खाद्य वस्तुओं का भाव आसमान छू रहा है। एक तो कमाई कम, ऊपर से हर वस्तु महंगी, ऐसे में आम आदमी के सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है। इन दिनों सरसों का तेल 200 रुपये व अरहर की दाल 100 रुपये किलो पर पहुंच गया है। वहीं आलू, प्याज के साथ हरी सब्जियों का मूल्य भी बढ़ा हुआ है। हरी सब्जियों में परवल 80, भिंडी 40, बैंगन 50, करेला व बोड़ा 60, टमाटर 50, कुंदरू 40 व नेनुआ 50 रुपये किलो बिक रहा है।
डीजल का दाम बढ़ने से खेती किसानी में आने वाली लागत बढ़ेगी जिससे पहले से ही कर्ज में फंसे किसानों की हालत और खराब होगी। प्रतिदिन डीजल के मूल्य में हो रहे इजाफा को लेकर किसानों में काफी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि अब खेती उपकरणों पर आधारित हो गई है। जोताई, सिंचाई, बोआई, कटाई व मड़ाई सब कुछ मशीनों से हो रहा है जिसमें काफी डीजल खर्च होता है। डीजल के मूल्य में आए दिन हो रहे इजाफे से खेती की लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है।
दाल व तेल के साथ रसोई गैस का दाम बढ़ा कर सरकार ने पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों को महंगाई की आग में झोंकने का काम किया है। सुषमा केशरी, गृहिणी
कोरोना महामारी के दौर में कीमतों में वृद्धि गरीबों के मुंह से निवाला छीनने के समान है। खाने की थाली से कभी सब्जी तो कभी दाल गायब हो जा रही है। निरुपमा केशरी, गृहिणी
मूल्यों में बढ़ोतरी के बाद खाना पकाना और भी महंगा हो गया है। बच्चों व परिवार के अन्य सदस्यों को उनका मनसपंद खाना नहीं मिल पा रहा है। गिरजा देवी, गृहिणी
एक तो कोरोना संक्रमण के कारण वैसे ही आमदनी पर असर पड़ा है। वहीं खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी ने महंगाई की आग में घी डाल दिया है। लीलावती देवी, गृहिणी