पीडीडीयू नगर। पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रोज पांच हजार यात्रियों को खतरा मोल लेते हैं। स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या पांच और छह की लंबाई कम है। ऐसे में ट्रेनों के चार से पांच कोच प्लेटफार्म के बाहर ही खड़े होते हैं। ऐसे में यात्रियों को पटरी से ही कोच में चढ़ना और उतरना पड़ता है। इसके बाद पटरियों पर चलकर प्लेटफार्म पहुंचते हैं।
पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रोज 110 ट्रेनें नियमित आती हैं। इसके अलावा स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। यहां से 25 से 30 हजार यात्री रोज ट्रेनों में सवार होते हैं और उतरते हैं। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें 24 कोच की होती हैं लेकिन पीडीडीयू जंक्शन के सभी प्लेटफार्म छोटे हैं। 24 कोच की ट्रेन के लिए प्लेटफार्म की लंबाई छह सौ मीटर होनी चाहिए लेकिन पांच और छह नंबर प्लेटफाॅर्म की लंबाई पांच सौ मीटर है। ऐसे में इन दोनों प्लेटफाॅर्म पर जब ट्रेनें आती हैं तो चार से पांच कोच प्लेटफार्म के बाहर ही रहते हैं। आम तौर पर ट्रेनों में जनरल कोच के साथ महिला और दिव्यांग कोच पीछे रहते हैं। ऐसे में यात्री जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पर उतरते हैं। ट्रेन में सवार होने वाले यात्री भी सामान और बच्चों के साथ पटरी पर चलकर कोच तक पहुंचते हैं।
इन दोनों इस प्लेटफाॅर्म पर रोज 30 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं। इनसे ढाई हजार से ज्यादा यात्री रेलवे लाइन पर उतरते हैं और इतने ही सवार होते हैं। प्लेटफॅार्म संख्या एक-दो और तीन-चार की भी लंबाई मानक के अनुरूप नहीं है। इन पर भी आने वाली ट्रेनों के दो कोच प्लेटफार्म के बाहर रहते हैं। इन ट्रेनों से भी लगभग ढाई हजार यात्री रेल लाइन पर उतरते हैं।
इनसेट-
ट्रेन खुलने पर पता चलता है कि स्टेशन आ गया
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या पांच और छह पर आने वाली ट्रेनों के जनरल कोच के यात्रियों को आम तौर पर पता ही नहीं चलता कि स्टेशन कौन सा आ गया है। उनके कोच प्लेटफार्म के बाहर रहते हैं। यात्रियों को लगता है कि यार्ड में खड़ी है। जब ट्रेन खुलकर आगे बढ़ती है तब पता चलता है कि उन्हें यहां उतरना था। ऐसे में कई यात्री चेन पुलिंग कर ट्रेन रोकते हैं और जुर्माना अदा करते हैं।
कोट-
यात्री सुविधाएं दुरुस्त की जा रही हैं। यार्ड रीमांडलिंग का काम होना है। प्लेटफार्मों की लंबाई बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जा चुका है। - दीपक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, पीडीडीयू मंडल