चहनिया(चंदौली)। देश की आजादी को 73 साल बीत गए चुके है। तब से अब तक सरकार की ओर से हर गांव में बिजली देने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम, सौभाग्य योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना सहित तमाम योजनाएं चलाई गईं पर कोई भी योजना विकासखंड के लक्ष्मणगढ़ कस्बे में उजाला नहीं कर सकी। आज भी वहां के लोग अंधेरे और ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं। सैकड़ों बार शिकायतें और प्रदर्शन करने के बाद भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते आज तक कस्बे में बिजली नहीं आ सकी है।
लक्ष्मणगढ़ स्थित भोजपुर बस्ती चहनिया विकासखंड कार्यालय से लगभग चार किलोमीटर दूर है। 50 परिवारों वाली इस बस्ती में लगभग 150 लोग रहते हैं। बावजूद इसके बस्ती में अब तक न तो बिजली के खंभे लगे हैं और न ही बिजली की तार दौड़े हैं। बिजली नहीं होने के कारण आज तक बस्ती में एक भी बल्ब भी नहीं जल सका है। यहां तक कि बच्चे ढिबरी की रौशनी में पढ़ने को विवश है। लोगों के अनुुसार यहां चकबंदी नहीं होने से सार्वजनिक मार्ग नहीं मिल सका जिस पर खंभे लगाएं जा सके। इस संबंध में एसडीओ आकाश ने बताया कि कई योजनाएं चलाई जा रही है, जिनके तहत बस्ती में जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
चहनिया। क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ स्थित भोजापुर बस्ती के रहने वाले लोगों में राजनीतिक दलों और सरकारी तंत्रों को लेकर काफी नाराजगी है। बस्तीवासियों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ कागजी खानापूर्ति में लगे रहते है। जबकि नेताओं को सिर्फ चुनाव के दौरान ही बस्तीवासियों की याद आती है। भोजापुर बस्ती के रहने वाले बृजमोहन राम ने कहा कि चुनाव आता है तो नेताओं को बस्तीवालों की याद आती है। चुनाव के बाद यहां कोई झांकने तक नहीं आता है। निठालू राम ने कहा कि बस्ती में लोग मोमबत्ती और ढिबरी के सहारे जीवन गुजार रहे है। एक तरफ डिजिटल इंडिया की बातें दूसरी तरफ हम लोग बल्ब की रोशनी के लिए तरस रहे है। कृष्णावती देवी ने कहा कि बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते यहां बिजली का खंभा तक नहीं लग पाया है। झम्मन राम ने कहा कि बस्ती के प्रति सभी ने सौतेला व्यवहार किया है। इसके चलते आज तक यहां विकास का पहिया कभी घूमा ही नहीं।