रबी के फसल की बर्बादी के आहत किसानों को दोबारा मौसम की बेरुखी की मार झेलनी पड़ रही है।
बरसात
न होने का असर अब धान की फसल पर पड़ने लगा है। इससे जहां फसल में झुलसा
रोग लगने से पत्तियां सूखने लगी हैं। इसके कारण तीस से चालीस प्रतिशत तक
उत्पादन घटने की भी आशंका बढ़ गई है। इससे किसान परेशान हैं।
अनुमान
के मुताबिक पिछले चार वर्षों में इस वर्ष अगस्त में सबसे कम बरसात हुई।
मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त में जिले में औसतन 85.75
मिमी बरसात हुई है। चकिया विकास खंड में 83.75 मिमी, शहाबंगज विकास
खंड क्षेत्र में 82. 45 मिमी, तो चंदौली विकास खंड में 83.35 मिमी दर्ज
की गई है।
वहीं नियामताबाद विकास खंड में अगस्त में औसतन 90 मिमी
बरसात हुई है।
बारिश कम होने का असर धान की फसल पर पड़ने लगा है।
फसल
में झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। तेज धूप के चलते दोपहर में पत्तियां
मुरझा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो इसका असर धान के उत्पादन पर
भी पड़ेगा। इसके चलते 30 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की संभावना है।
वहीं रोग की चपेट में आने से धान की पत्तियां सूख रही हैं।
किसानों का कहना
है कि यदि बरसात नहीं हुई तो कुछ दिनों के बाद पौधा भी सूखने लगेगा। इससे
खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो जाएगी।
सिंचाई के अभाव में खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। निजी संसाधनों के सहारे किसी तरह खेतों की सिंचाई की जा रही है।
बरसात
के अभाव में सिंचित इलाके की फसल पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
बरसात न होने का असर बांधों के जलस्तर पर पड़ रहा है।
प्रगतिशील
किसान सोनू पाठक व नरेंद्र सिंह का कहना है कि अमूमन मानसून सत्र के
अंत में धान की फसल में झुलसा व खैरा रोग का प्रकोप होता है, लेकिन इस
वर्ष अगस्त में बरसात कम होने के चलते फसल में पहले ही रोग लगना शुरू हो
गया है।