चकिया/ शिकारगंज। क्षेत्र में स्थित लतीफशाह तथा राजदारी पर्यटन केंद्रों पर हर वर्ष पानी में डूब कर या बहकर सैलानियों की मौत का सिलसिला जारी है। स्थानीय प्रशासन की ओर से सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगाकर ही खानापूर्ति की जा रही है। इसके अलावा सैलानियों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है।
लतीफशाह बीयर से ठीक नीचे स्थित जलकुंड पर्यटकों के लिए मौत का ठिकाना बन चुके हैं। इस कुंड में डूब कर प्रति वर्ष सैलानियों की मौत का सिलसिला जारी है। अभी हाल में ही कुंड में डूब कर दो लोगों की मौत हो चुकी है। राजदारी जलप्रपात भी अत्यंत खतरनाक है। प्रपात में पानी गिरने वाले स्थान के ठीक ऊपर अनेक सैलानी मंडराते हैं तथा पानी के प्रवाह तथा फिसलन के कारण गहरे प्रपात में गिर जाते हैं। प्रताप में गिरने के से कई सैलानियों की मौत पिछले दो दशक में हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन इस घटना में पुरी तरह लापरवाह बना हुआ है। लतीफ शाह की हालत यह है की चेतावनी बोर्ड लगा कर ही कम चलाया जा रहा है। जानलेवा कुंड की बैरिकेडिंग भी नहीं कराई जा सकी है। इससे आम जन सैलानी कुंड में नहाने के चक्कर में डूबते रहे हैं। वहीं लतीफशाह में सिर्फ पर्यटन के सीजन बरसात में ही इक्का दुका पुलिस कर्मियों की तैनाती होती है। उसके बाद कोई ड्यूटी नहीं लगती है। राजदरी पर्यटन केंद्र पर तो चेतावनी बोर्ड के साथ ही राजदारी जलप्रपात के खतरनाक किनारो पर तो रेलिंग के जरिए बैरिकेडिंग की गई है। चंद्रप्रभा से लेकर राजदरी प्रपात नदी के प्रवाह के रास्ते में कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं होते हैं। पर्यटन के सीजन बरसात में जरूर जनपद में गठित जल सेना के कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लोगों को सावधान करने के उद्देश्य लगाई जाती है लेकिन ड्यूटी देने के बाद उचित पारिश्रमिक न मिलने से जल सेना भी मायूस है। चकिया के पुलिस क्षेत्राधिकारी शेषमणि पाठक ने कहा की पर्यटन सीजन में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए तथा उन्हें चेतावनी देने के लिए ड्यूटी लगाई जाती है। आगे भी ड्यूटी लगाने का कार्य प्रशासन करेगी।
चकिया/ शिकारगंज। जिले में पानी में डूबने या बहाने की घटनाओं को रोकने या उन्हें कम करने के उद्देश्य जिला प्रशासन की ओर से वर्षों पूर्व जल सेना नामक संगठन की स्थापना की गई थी। इस संगठन को तैयार करने में पूर्व जिलाधिकारी शंभू नाथ यादव का महत्व पूर्ण योगदान था।
एनडीआरएफ के द्वारा प्रशिक्षण तथा उनके संसाधनों से लैस जल सेना के 45 युवक और युवती हमेशा अपने अभियान के लिए तत्पर रहते हैं। जिले के पर्यटन केंद्र तथा गंगा के साथ अन्य तालाबों पोखरो में होने वाली डूबने और बहने की घटनाओं को रोकने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी के प्रयास से पुलिस जल सेना की न्यू डाली गई थी। इन जल सैनिकों को प्रशिक्षित एनडीआरएफ द्वारा किया गया है। जल सैनिक पानी में डूबने से बचाने पानी में दुबे व्यक्तियों को गोताखोरी के माध्यम से निकालने के अलावा खतरनाक एवं जानलेवा पिकनिक और पर्यटन स्थलों पर लोगों को चेताने के लिए प्रतिबद्ध हैं।एनडीआरएफ इन्हें लाइट जैकेट अलार्म सिस्टम आदि उपकरण भी उन्हें दिए गए हैं। पुलिस द्वारा जल सेना का अधिकृत पहचान पत्र भी जारी किया गया है। जल प्रपात पर जल सेना की ड्यूटी पर्यटन सीजन में लगाई गई थी। वे जल सैनिक वर्ष भर कम नहीं पाते हैं। तथा ड्यूटी न मिलने पर अपना निजी कार्य या मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं। जल सेना की टीम का नेतृत्व कन्हैया लाल बिंद के हाथों में है उनके अलावा जल सेना के चंद्रहास, विद्यासागर, पूजा साहनी, रोशनी, मनीषा, राजू साहनी कहते हैं की मानदेय तय न होने से उनकी रोजी रोटी का कोई ठोस आधार नहीं है। फिर भी वह अपने कर्तव्य के प्रति सचेत हैं। जल सेना के प्रधान कन्हैया लाल बिंद ने कहा की जल सैनिकों के लिए निश्चित रोजगार की व्यवस्था होने से उनका उत्साह बढ़ेगा तथा और लोग भी जल सेना में आने के लिए तत्पर होंगे।