महज दो दिन की बारिश ने प्रदेश सरकार के सड़कों को गड्ढामुक्त करने के दावे और विभागों के कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति पहले से ही खराब थी लेकिन बुधवार और बृहस्पतिवार को हुई बारिश के बाद सड़कें और बदतर हो गई। इन सड़कों को शीघ्र नहीं बनाया गया तो बरसात के दिनों में स्थिति और भी दयनीय हो जाएगी। सड़कों पर बिछाई गई गिट्टियां फिर से उखड़कर फैल गई हैं।
सड़कों पर बने गड्ढों को भरने का काम 20 अक्टूबर तक पूरा कर लेना था। मगर मियाद बीत जाने के बाद भी सड़कों की दशा में सुधार नहीं आया है। लोक निर्माण विभाग का दावा है कि जितना धन शासन से मिला था उससे अधिक सड़कों की मरम्मत कराई जा चुकी है। पीडब्ल्यूडी विभाग की मानें तो जिले की 458.82 किलोमीटर की सड़कों पर बने गड्ढों को भरने के लिए शासन से 5.16 करोड़ रुपयों की मांग की थी। इसमें विभाग को अब तक केवल 1.72 करोड़ रुपये ही मिले हैं। विभाग का दावा है कि प्राप्त धन से करीब 330 किलोमीटर की सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिख रही है। कुछ सड़कों को छोड़कर सभी पर चलना जोखिम भरा है।
धीना। लगभग 13 किलोमीटर का धीना-जमानिया मार्ग काफी दिनों से क्षतिग्रस्त है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने सिकठा गांव तक पांच किलोमीटर की सड़क की मरम्मत पिछले दिनों तो कराई है पर शेष आठ किलोमीटर की दशा बहुत ही खराब है। बरसात से पहले सड़क को नहीं बनाए जाने पर लोगों का चलना मुश्किल हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी विभाग के जेई छोटेलाल ने बताया कि सड़क के मरम्मत के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
सकलडीहा। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कस्बा के मुख्य सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इससे कस्बा में जलभराव की समस्या बनी रहती है। दो दिन की बारिश में सड़क झील में तब्दील हो गई थी। अभी भी सड़क पर पानी लगा हुआ है। वर्ष 2020 के जनवरी माह में पौने चार करोड़ रुपयों की लागत से डेढ़ किलोमीटर सड़क, नाला व पटरी निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को स्वीकृत मिली लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नही हो पाया है। सड़के गड्ढे में तब्दील हो गई है।
कमालपुर। दो दिनों की बारिश ने लोक निर्माण विभाग की पोल खोल कर रख दी है। सकलडीहा से कमालपुर लगभग 13 किलोमीटर के मार्ग पर चलने से लोग कतराने लगे हैं। बरसात के बाद सड़क पर जगह-जगह गड्ढ़े बन गए हैं। कमालपुर पुलिस चौकी के पास, इनायतपुर, गौसपुर व गोहदा विशुनपुरा गांव के पास सड़क पर बरसात का पानी भर गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कचहरी के काम से सकलडीहा जाने वाले लोग खराब सड़क की वजह से रास्ता बदलकर जाने को विवश हैं। आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
पीडीडीयू नगर मार्ग से जुड़ा भीषमपुर-शेरवा मार्ग पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गया है। तीन वर्षों से मार्ग पर आवागमन करना राहगीरों व ग्रामीणों के लिए भारी मुसीबत बना हुआ है। इस सड़क से होकर चंदौली व मिर्जापुर जनपद के लोग आवागमन करते हैं। मार्ग पर सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर, वनदेवी, भीषमपुर, फिरोजपुर, टकटकपुर, हाजीपुर, सेमरौर, भटवारा खुर्द, भटवारा कला, पिपरिया, कुदरा, नीवी आदि गांव के ग्रामीणों का आना-जाना होता है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने 9.6 किलोमीटर की सड़क पर लेपन कार्य के लिए लगभग एक करोड़ 20 लाख रुपए की कार्ययोजना बनाकर शासन को 2020 वित्तीय वर्ष में भेजी थी जिसकी स्वीकृति नहीं मिली। वर्ष 2021 में भी कार्ययोजना भेजी गई है।
नौगढ़। स्थानीय बाजार से चिकनी, पढौ़ती, बरबसपुर, बैरगाढ़ , धनकुवारी आदि गांवों को जाने वाले मार्ग की हालत जर्जर है। पीडब्ल्यूडी की अनदेखी के चलते लगभग 21 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 15 साल बीत जाने के बाद भी लेपन कार्य तक नहीं कराया जा सका है। सड़क पर गड्ढों की भरमार हो गई है। सड़क मरम्मत के लिए पूर्व में ग्रामीणों ने तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र भी दिया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एंबुलेंस चालकों ने बताया कि चिकनी, बैरगाढ़, बरबसपुर आदि गांवों में कोई केस आने पर पहुंचने में काफी समय लग जाता है।
कंदवा। क्षेत्र के कंदवा-ककरैत मार्ग पर बने बड़े-बड़े गढ्ढे जानलेवा बन गए हैं। इस पर आए दिन दुर्घटना होती रहती है। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन उनके द्वारा आज तक कोई सार्थक पहल नहीं हुई। यूपी और बिहार को जोड़ने के लिए वर्ष 2008 में इस मार्ग का निर्माण कराया गया था। इस मार्ग से प्रतिदिन तेल्हरा,कन्दवा, अमड़ा,कम्हरिया,बहेरा,अदसड़, सिसौरा,बकौड़ी आदि दर्जनों गांवों के लोगों का आवागमन होता है। यह मार्ग यूपी और बिहार के लोगों को जोड़ने का सबसे सुगम मार्ग है लेकिन रख रखाव और मरम्मत के अभाव में सड़क पूरी तरह बदहाल हो गई है।
सड़कों की मरम्मत के लिए शासन से धन की मांग की गई है। धन अवमुक्त होते ही गड्ढों को भरने और सड़कों को बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
डीपी सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी