चंदौली। पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय में इन दिनों रोजाना जांच में 8 से 10 मरीज मलेरिया के मरीज मिल रहे हैं। इसको देखते हुए जिला चिकित्सालय में डेंगू और मलेरिया के मरीजों के लिए 8 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है। जिसमें मरीजों को भर्ती किया जा सकता है, लेकिन अभी जो मरीज आ रहे हैं, वे दवा से ही ठीक हो जा रहे हैं। मलेरिया वार्ड में एक भी मरीज भर्ती नहीं हैं।
पं. कमलापति त्रिपाठी जिला चिकित्सालय की ओपीडी में इन दिनों रोजाना एक हजार से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इससे ओपीडी से लेकर रजिस्ट्रेशन काउंटर तक पर मरीजों की भीड़ लगी रहती है। उधर, 300 से ज्यादा बुखार से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। बुखार से पीड़ित मरीजों को खून की जांच के लिए चिकित्सक डेंगू और मलेरिया की जांच के लिए पैथालॉजी में भेज रहे हैं। जांच में प्रतिदिन 8 से 10 मरीज मलेरिया के पाए जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बुखार से पीड़ित मरीज की सबसे पहले खून की जांच कराना जरूरी है। इससे पता चल जाता है कि मरीज को कौन सा बुखार है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मलेरिया का बुखार ठंड देकर आता है। अगर किसी मरीज को बुखार होने पर ठंड महसूस हो तो तत्काल खून की जांच कराएं और चिकित्सक से सलाह लेकर उपचार कराएं। पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डाॅ. आरके वर्मा बताया कि मच्छर काटने से मलेरिया, फाइलेरिया,डेंगू, पीला बुखार शामिल हैं। मलेरिया परजीवी के कारण होता है जो एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है। डेंगू वायरल बीमारी है जो एडीज मच्छरों के काटने से फैलती है। चिकनगुनिया भी एक वायरल बीमारी है जो एडीज मच्छरों के काटने से फैलती है। पीला बुखार भी एक वायरल बीमारी है जो मच्छरों के काटने से फैलती है। सीएमएस डॉ. सत्य प्रकाश का कहना है कि जिला अस्पताल में 8-10 मरीज मलेरिया के मिल रहे हैं। हालांकि उनकी हालत सामान्य है। डेंगू और मलेरिया के मरीजों के लिए 8 बेड का वार्ड बनाया गया है।