चकिया। विकास खंड के सिकंदरपुर गांव में स्थित सिकंदरपुर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बदहाल है। अस्पताल में न दवाई है,न ही चिकित्सक ही रोज आते हैं। कभी कभार आने वाले चिकित्सकों की तैनाती तथा गिनती की आयुर्वेदिक दवाओं के सहारे चिकित्सालय मरीजों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहा है।
वर्ष 1982 में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री पंडित लोकपति त्रिपाठी के प्रयासों से सिकंदरपुर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना की गई थी। अस्पताल बनने के बाद यहां दवाओं की उपलब्धता तथा चिकित्सक की रोजाना हाजिरी से लोगों की उम्मीदे परवान चढ़ी। वर्तमान में अस्पताल में आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. बालमुकुंद प्रसाद, फर्मासिस्ट रामायण प्रसाद कुशवाहा तथा चपरासी प्रभुनारायण कुशवाहा तैनात है। लगभग पांच बिस्वा के क्षेत्र में निर्मित यह चिकित्सालय दो वर्ष पूर्व पूरी तरह बदहाल रहा, लेकिन अब इस चिकित्सालय के भवन की मरम्मत कर उसकी रंगाई-पुताई कर चिकित्सालय को नया आयाम दिया गया है, लेकिन चिकित्सक की कभी कभार आने की आदत तथा दवाओं की भारी कमी चिकित्सालय के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है। चिकित्सालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इससे ग्रामीण नाराज है। शुक्रवार को अस्पताल पर आए ग्रामीण शशिकांत श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश गुप्ता, धीरज विश्वकर्मा, मनीष यादव, संदेश यादव, परमानंद भारती, छन्नू भारती ने बताया कि अस्पताल पर चिकित्साधिकारी कभी कभार आकर कोरम पुरा करते हैं। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में दवाओं की भारी कमी है, सिर्फ सस्ती आयुर्वेदिक दवाएं ही अस्पताल में मौजूद है। इससे गंभीर रोगों का इलाज संभव नहीं है।