पड़ाव। मुगलों के समय से आबाद पड़ाव चौराहे का इतिहास काफी पुराना है। यह चौराहा देश के कई राज्यों को जोड़ता है। इसे पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। देश के कई राज्यों को जोड़ने, कारोबार और व्यवसाय की दृष्टि से भी इस चौराहे का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वहीं राजैनतिक रूप से भी पड़ाव अछूता नहीं रहा है। यहां पर अब तक देश के कई पूर्व प्रधानमंत्री आकर परम सत्ता के प्रतीक अवधूत राम भगवान आश्रम सर्वेश्वरी समूह में माथा टेककर हाजिरी लगा चुके हैं। अब 16 फरवरी को आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पड़ाव पर आने वाले प्रधानमंत्रियों की कड़ी में शामिल हो जाएंगे।
पड़ाव चौराहे पर स्थित सर्वेश्वरी समूह आश्रम में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई, पूर्व पीएम चंद्रशेखर सिंह और देश के उप प्रधानमंत्री जगजीवनराम आ चुके हैं। इसके अलावा लोकसभा चुनावों के दौरान पड़ाव चौराहे पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, लालबहादुर शास्त्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, वीपी सिंह, एचडी देवगौड़ा, लालकृष्ण आडवाणी भी आ चुके हैं। इस बार पड़ाव चौराहे पर बनकर लगभग तैयार एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्मारक का लोकार्पण करने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं।
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पड़ाव अपने आप में सदियों से अपनी एक अलग पहचान बनाएं हुए है। गौतम बुद्ध, मुगल काल, बिटिश का शासन से लेकर अब तक पड़ाव का महत्व बरकरार है। पड़ाव अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक से जुड़ रहा है। 10 फरवरी को आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कहा कि उनकी पुण्यस्थली को प्रेरणा स्थली के रूप में जाना जाएगा। यहां के लोगों का कहना है की गौतम बुद्ध जी ने इसी रास्ते से होते हुए सारनाथ पहुंचे थे। दिल्ली से कोलकाता तक जीटी रोड यही से होकर गुजरी है। जिसका निर्माण शेरशाह सुरी ने कराया था। मुगल भी इसी रास्ते का प्रयोग करते थे। कहते हैं कि मौर्य काल में भी इस रास्ते का उपयोग होता रहा है। उस काल में राजा-महाराजा हों, सौनिक हों या यात्री यहां पड़ाव डालते थे और गंगा पार करके आगे की यात्रा करते थे। इस प्रकार देश के कई महत्वपूर्ण राज्यों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण चौराहा पड़ाव बना।
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पड़ाव का व्यवसाय
यहां का मुख्य व्यवसाय ट्रांसपोर्ट है। नगर आधा दर्जन पंप पार्ट्स की छोटी बड़ी दुकानें, ट्रांसपोर्ट, प्राइवेट पालटेक्निक कालेज आधा दर्जन फ्लैटों के साथ-साथ छोटी-छोटी दूकाने हैं। यहां के आस-पास के दर्जनों गांवों जलीलपुर, मढिया, बहादुरपुर, चौरहट, भोजपुर, रतनपुर, सेमरा, कटेसर,बखरा व्यासपुर नींबुपर, चांदीतारा आदि गांवों के लोगों की जरूरतों को पड़ाव पूरा करता है। यहां की आबादी लाख के ऊपर है।
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पड़ाव की समस्या
इतना सब कुछ होने के बाद भी पड़ाव चौराहा मूलभूत सुविधाओं से जूझ रह है। इतनी आबादी के मानक को पूरा करने के बाद भी यहां कोई सरकारी अस्पताल, पेयजल की आपूर्ति, सरकारी इंटर कालेज, डिग्री कालेज, शौचालय, पानी निकासी के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। पड़ाव को नगर पंचायत का दर्जा भी नहीं मिल सका। अभी शासन द्वारा सुजाबाद के दो गांव डोमरी को मिलाकर नगर पंचायत बनाने की घोषणा की गई है।