पीडीडीयू नगर। रसोई गैस सिलंडर के मूल्य में 50 रुपये की हुई वृद्धि से आम आदमी के लिए खाना पकाना काफी महंगा हो गया है। कमर्शियल एलपीजी के बाद अब रसोई गैस सिलिंडर के दाम में भी इजाफा कर दिया गया है। विगत शनिवार को 14.2 किलोग्राम के सिलिंडर के दाम में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि शनिवार यानी सात मई 2022 से ही प्रभावी हो गई है। इससे पहले घरेलू एलपीजी के दाम 22 मार्च को 50 रुपये बढ़े थे।
दाम बढ़ने के बाद जिले में 1030 रुपये में मिलने वाले घरेलू सिलिंडर का मूल्य बढ़कर 1080 रुपये प्रति सिलिंडर हो गया है। घरेलू सिलिंडर के दाम बढ़ने से गृहणियों में नाराजगी है। गृहणियों का कहना है कि रसोई गैस पर सरकार को फिर पर्याप्त सब्सिडी देने का फैसला लेना चाहिए जिससे आम जनता को राहत मिल सके। खाद्य पदार्थ के दाम बढ़ने से किचन का बजट पहले से हीं गड़बड़ाया हुआ है। अब सिलिंडर के बढ़े मूल्य से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कमरतोड़ महंगाई में घर का खर्च पूरा करना बेहद मुश्किल होने लगा है। ऐसे में मध्यवर्गीय व गरीब परिवारों की मुश्किल काफी बढ़ जाएगी। सरकार को महंगाई कम करने के उपाय करने चाहिए।
सरकार को बढ़ती महंगाई पर ध्यान देना चाहिए। पहले खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ गया था। अब रसोई गैस के सिलिंडर पर दाम बढ़ने से घर के खर्च पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। इससे किचन का बजट चलाना मुश्किल हो रहा है। अनीता यादव।
गैस सिलिंडर के बढ़ते दामों ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। हरी सब्जियों सहित सरसों व रिफाइंड तेल के दाम में तो लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। वहीं एकाएक 50 रुपये गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने से अब पूरे माह का किचन का बजट गड़बड़ा गया है। नम्रता।
रोजमर्रा की चीजों पर बढ़ रही महंगाई आमजन की कमर तोड़ रही है। ऊपर से रसोई गैस सिलेंडर के बढ़े दामों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी का सीधा असर रसोई की बजट पर पड़ेगा। सरकार को बढ़ती महंगाई कम करनी चाहिए। सुनीता जायसवाल। सब्जी से लेकर अन्य खाद्य वस्तुएं पहले से ही आसमान छू रही है, अब गैस की कीमत बढ़ा कर तगड़ा झटका दिया गया है। सरकार को इस पर विचार करने की जरूरत है। गैस के दाम बढ़ने से अब निम्न व गरीब वर्ग को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ेगा। ज्योति।
रसोई गैस महंगी होने से केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना की सफलता पर ही सवालिया निशान लग गया है। जिले भर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों ने घरेलू गैस के दाम बढ़ने से सिलेंडर भरवाना ही बंद कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में तो इन लाभार्थियों ने फिर से परंपरागत ईंधन पर खाना बनाना शुरू कर दिया है।
जिले में उज्ज्वला गैस के सिलिंडर महज शोपीस बनकर रह गए हैं। गैस के दाम बढ़ने से 50 प्रतिशत लाभार्थी ही गैस रिफिल कराने की हिम्मत जुटा पा रहे है। जिले में उज्ज्वला योजना के करीब एक लाख गैस कनेक्शन लाभार्थियों को दिए गए हैं लेकिन वे एक बार के बाद दोबारा रिफिल की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। कई ग़रीबों के चूल्हे तो घर के कोने की शोभा बढ़ा रहे हैं।
लगातार बढ़ते गैस सिलिंडर के दामों से एक बार फिर गरीब तबके के लोग गोबर के उपले और लकड़ी जलाकर चूल्हे पर खाना बनाने को विवश हैं। उज्ज्वला योजना की पड़ताल में सामने आया कि जरूरतमंदों को मुफ्त में मिले गैस चूल्हे और सिलिंडर अब घर पर महज शोपीस बनकर रह गए हैं। जिलेभर में लगभग एक लाख परिवारों को इस योजना का लाभ दिया गया है लेकिन खुद एजेंसी संचालकों का मानना है कि सिलिंडर के दाम बढ़ने से सालभर में 50 फीसद लाभार्थी ही इस योजना के सिलिंडर रिफिल करबा रहे हैं।