कंदवा। इन दिनों देश संक्रमण काल से गुजर रहा है। आध्यात्मिक जागरूकता से ही देश की प्राचीन संस्कृति को बचाया जा सकता है। इसके लिए हर घर में सत्संग होना जरूरी है। ये बातें शुक्रवार को तंत्र आश्रम गायघाट वाराणसी के महंत चंद्रमौलि मुनि उदासीन खड़ेश्वरी बाबा ने मां भवानी प्राकट्य स्थल कसवढ़ डेहरियाडीह में कहीं।
खड़ेश्वरी बाबा ने कहा कि ईश्वर की भक्ति कभी निष्फल नहीं होती। शबरी के कई जन्मों का पुण्य उसे त्रेता युग में मिला। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रभु राम ने उसके जूठे बेर खाना स्वीकार किया था। कहा कि दान देने पर मनुष्य को कई जन्मों का लाभ मिलता है।इसलिए मनुष्य को धार्मिक कार्यों में दान अवश्य करना चाहिए। शिष्यों से कहा कि तीन से आठ फरवरी तक होने वाले रुद्र चंडी महायज्ञ को सफल बनाने में सहयोग करें। इस दौरान विक्की सिंह, शशि रमण दुबे, अभय दूबे, मंगला सिंह, विपिन उपाध्याय, अखिलेश उपाध्याय, डॉ संजय सिंह, प्रज्ञा दुबे, धर्मशिला सिंह, रीना दुबे, सीमा तिवारी, ममता तिवारी आदि थीं। संवाद