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Chandauli News: राज्यसभा में गूंजा चंदौली के पर्यटन विकास का मुद्दा, राजदरी-देवदरी को स्वदेश दर्शन 2.0 में शामिल करने की मांग

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सदन में बोलतीं राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह। स्रोत:-जागरूक पाठक
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चंदौली के चकिया-नौगढ़ क्षेत्र में स्थित राजदरी-देवदरी जलप्रपात और चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य के पर्यटन विकास का मुद्दा राज्यसभा में गूंजा। भाजपा राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह ने विशेष उल्लेख के दौरान केंद्र सरकार से इस प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक क्षेत्र को स्वदेश दर्शन 2.0 योजना में शामिल करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन बेहतर आधारभूत सुविधाओं और व्यवस्थित प्रबंधन के जरिये इसे राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित किया जा सकता है।
सांसद ने कहा कि विंध्य पर्वत शृंखला से घिरा राजदरी-देवदरी क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, जलप्रपातों और जैव विविधता के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। चंद्रप्रभा नदी और आसपास का वन क्षेत्र इस इलाके को विशेष बनाता है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र साहित्यिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। महान साहित्यकार देवकी नंदन खत्री के चर्चित उपन्यास ‘चंद्रकांता’ की पृष्ठभूमि से इस क्षेत्र का संबंध होने के कारण इसकी सांस्कृतिक पहचान भी समृद्ध है।
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सुविधाएं बढ़ीं, अब व्यवस्थित विकास की जरूरत

दर्शना सिंह ने कहा कि क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नेचर सेंटर, ऑडिटोरियम और पर्यटकों के ठहरने के लिए कॉटेज जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इन सुविधाओं का विस्तार, बेहतर रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि राजदरी-देवदरी जलप्रपात और चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य को स्वदेश दर्शन 2.0 से जोड़ा जाता है तो यहां ईको-Tूरिज्म और होम-स्टे को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जा सकता है। इससे क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


युवाओं को मिलेगा रोजगार, पलायन पर लगेगी रोक

सांसद ने कहा कि पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं को गाइड, टैक्सी, होटल, होम-स्टे और अन्य सेवाओं में रोजगार मिल सकता है। इससे युवाओं के दूसरे शहरों की ओर पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी। पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं पर्यटन स्थलों पर कैंटीन संचालन, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और हस्तशिल्प के माध्यम से आय अर्जित कर सकती हैं। इससे महिला सशक्तीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।


ब्लैक राइस और आदमचीनी चावल की भी होगी ब्रांडिंग

राज्यसभा सांसद ने चंदौली को धान का कटोरा बताते हुए जिले के स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि जिले का ब्लैक राइस ओडीओपी योजना में शामिल है, जबकि आदमचीनी चावल को वर्ष 2023 में जीआई टैग मिला है। इसके अलावा यहां की पारंपरिक जरी-जरदोजी कला भी अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के विकास के साथ इन उत्पादों और स्थानीय कला की ब्रांडिंग को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे किसानों, बुनकरों और कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिल सकेगा। एग्री-टूरिज्म और हस्तशिल्प आधारित पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।
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राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की पहल
उन्होंने केंद्रीय पर्यटन मंत्री से आग्रह किया कि चंदौली के राजदरी-देवदरी जलप्रपात और चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य को स्वदेश दर्शन 2.0 योजना में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि ऐसा होने पर पूर्वांचल के इस प्राकृतिक क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। साथ ही पर्यटन विकास के माध्यम से स्थानीय रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
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