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कोरोना काल में लोगों का सहारा बने थे समाजसेवी

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पीडीडीयू नगर (चंदौली)। कोरोना काल में जब सब कुछ बंद हो गया था। लॉकडाउन और कोरोना के डर से लोग घरों में कैद हो गए और खाने पीने के भी लाले पड़ गए। ऐसे में नगर के समाजसेवी बिना किसी भय के लोगों के दरवाजे तक पहुंचे और खाने के पैकेट, अनाज सहित अन्य सामान उपलब्ध कराया। एक दो दिन, सप्ताह नहीं बल्कि सहायता का यह सिलसिला चार माह तक चला। सड़कों पर पैदल चलते मजदूर और परेशानी से जुझते लोगों की तस्वीर के बीच समाजसेवियों के पहल का सुखद एहसास भी लोगों के दिलो दिमाग में आज भी आज भी ताजा है।
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कोरोना के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च को जनता कर्फ्यु लगाया गया था। प्रधानमंत्री के इस आह्वान का लोगों ने खूब पालन किया और 22 मार्च को लोग घरों में बंद रहे। शाम के वक्त थाली और ताली बजाकर कोरोना काल में लोगों की सहायता में जुटे फ्रंट लाइन वर्करों का सम्मान किया। 25 मार्च से देश लॉकडाउन हो गया। चौबीसों घंटे जागने वाली पीडीडीयू नगर की सड़कों के साथ पूरे जिले के लोग घरों में कैद हो गए। ऐसे समय में लोगों के लिए संबल बने नगर के कुछ समाजसेवी। समाजसेवी चंद्रशेखर यादव ने अमोघपुर, महेवा, गोधना, तारनपुर, कुढ़कला, रेमा, नियामताबाद, धरना, पचोखर, अलीनगर, मवई सहित विभिन्न गांवों में घूमकर लोगों को खाना उपलब्ध कराया। प्रतिदिन 2000 पैकेट भोजन वितरित किए। यही नहीं प्रवासी मजदूरों को पानी, फल ओर बिस्कुट बांटे।
समाजसेवी श्रवण यादव ने नगर के 25 वार्डों के साथ दुलहीपुर, नौगढ़ के मलिन बस्ती में घूम घूमकर लोगों को सूखा राशन उपलब्ध कराए। चंदासी और मैनाताली में बने क्वारंटीन सेंटर में लंगर चलवाया। परोरवा निवासी अजीत यादव बब्बू ने भी नियामताबाद ब्लाक के खजूर गांव, हथेड़वा, छित्तमुपर, पुरैनी, चांदीतारा, साहुपुरी, व्यासपुर, फत्तेपुर, मन्नापुर, गौरया, खुटहा, कबीरपुर, नाथुपुर, भुजहुआ, परोरवा, महाबलपुर के साथ कटरिया में कैंप लगाकर मजदूरों को खाना खिलाया। काली महाल निवासी जितेन्द्र गुप्ता ने भी पूरे लॉकडाउन के दौरान लोगों को लाई, चना, साबून, तेल, नमक, आलू सहित अन्य सामग्री वितरित किए।
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