पीडीडीयू नगर। जिले की बेसिक शिक्षा व्यवस्था का चौंकाने वाला चेहरा सामने आया है। जिले के 11 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या 30 से भी कम है। इनमें कुछ विद्यालयों में महज पांच से 15 बच्चे ही पढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, कई ऐसे विद्यालय भी हैं, जहां 70 से 111 छात्र होने के बावजूद केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई हो रही है। यह तस्वीर बेसिक शिक्षा विभाग में संसाधनों के असंतुलित वितरण और शिक्षक तैनाती पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
निजी विद्यालयों की बढ़ती लोकप्रियता, अभिभावकों की बदलती सोच और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन का असर सरकारी स्कूलों पर दिख रहा है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर शिक्षकों की तैनाती का संतुलन नहीं बन पाया है। शिक्षा विभाग हर वर्ष स्कूल चलो अभियान, जागरूकता रैली और घर-घर संपर्क अभियान चलाकर बच्चों को सरकारी विद्यालयों से जोड़ने का प्रयास करता है, लेकिन कई विद्यालयों में नामांकन बढ़ने के बजाय लगातार घटता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जिन विद्यालयों में छात्र संख्या अधिक है, वहां शिक्षकों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर शिक्षक तैनाती का आधार क्या है और क्या समय-समय पर इसका पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।
केस-1 : 14 बच्चों पर पांच शिक्षक, स्कूल में मिले सिर्फ एक
बरहनी ब्लॉक के सेवखरी कंपोजिट विद्यालय के प्राथमिक खंड में नामावली में 15 छात्र दर्ज हैं। निरीक्षण के दौरान 14 बच्चे उपस्थित मिले। विद्यालय में पांच शिक्षक तैनात हैं, लेकिन मौके पर केवल एक शिक्षक बृजेश खरवार ही मौजूद मिले। बाकी शिक्षक अनुपस्थित रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब छात्र कम हैं तो शिक्षक अधिक क्यों और जब शिक्षक तैनात हैं तो विद्यालय में अनुपस्थित क्यों?
केस-2 : 19 में सिर्फ पांच बच्चे पहुंचे स्कूल
बरहनी विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर में मात्र 19 छात्र-छात्राओं का नामांकन है। इनमें भी बृहस्पतिवार को केवल पांच बच्चे उपस्थित मिले। यहां एक सहायक अध्यापक राहुल सिंह और एक शिक्षामित्र मधुबाला तैनात हैं। दोनों उपस्थित थे और पांच बच्चों को एक ही कक्ष में पढ़ा रहे थे।
केस-3 : यहां 111 बच्चों के लिए सिर्फ एक शिक्षक
नौगढ़ विकासखंड के गोलाबाद उच्च माध्यमिक विद्यालय में 111 छात्र नामांकित हैं, लेकिन पिछले आठ वर्षों से पूरा विद्यालय केवल एक शिक्षक आशुतोष बहादुर सिंह के भरोसे संचालित हो रहा है। इसी तरह गहिला उच्च माध्यमिक विद्यालय में लगभग 70 छात्र हैं, लेकिन वहां भी केवल एक शिक्षक तैनात हैं। ऐसे विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है।
केस-4 : कहीं तीन शिक्षक, कहीं एक भी नहीं
औरवाटाड़ प्राथमिक विद्यालय में 26 छात्रों पर एक सहायक अध्यापक और दो शिक्षामित्र कार्यरत हैं। वहीं, देवदत्तपुर प्राथमिक विद्यालय में 30 छात्रों को एक सहायक अध्यापक और दो शिक्षामित्र पढ़ा रहे हैं। इसके विपरीत जमसोत उच्च माध्यमिक विद्यालय में 35 छात्र नामांकित हैं, लेकिन वहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है।
केस-5 : कम बच्चे, बेहतर निगरानी का दावा
चकिया के पूर्व माध्यमिक विद्यालय निचोट कला में मात्र 28 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। यहां दो सहायक अध्यापक तैनात हैं। विडंबना है कि शिक्षक इसे अच्छा बता रहे हैं। उनका कहना है कि कम छात्र संख्या होने से प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान देने का अवसर मिलता है और उनकी शैक्षणिक प्रगति पर बेहतर निगाह रखी जा सकती है।
कोट-
सभी शिक्षकों को ड्राप आउट बच्चों को प्रवेश दिलाने और अभिभावकों को जागरूक कर परिषदीय विद्यालयों में दाखिला कराने के निर्देश दिए गए हैं। - सचिन कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी