जिले में एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) से संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इस साल तीन महीने (अप्रैल, मई और जून) एचआईवी के 12 नए केस मिले हैं। पिछले दो वर्षों की तुलना में इस बार एचआईवी संक्रमितों की संख्या तीन गुना अधिक है। 2024-25 और 2025-26 में इन तीन महीनों में क्रमश: तीन और चार संक्रमित मिले थे। एचआईवी के मामले बढ़ने से प्रशासन के जागरूकता कार्यक्रम पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में अप्रैल में 5, मई में 4 और 19 जून तक एचआईवी के 3 नए संक्रमित मिले। इनमें रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले वेंडर और चंदासी कोल मंडी के कर्मी ज्यादा हैं। 2014 से मार्च 2026 तक पीडीडीयू नगर और आसपास के क्षेत्रों में कुल 198 एचआईवी संक्रमित चिह्नित किए गए। इनमें 32 गर्भवती महिलाएं और 166 अन्य लोग शामिल थे। अब तक छह संक्रमितों की मृत्यु भी हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए जागरूकता, नियमित जांच और सुरक्षित व्यवहार बेहद जरूरी है। एचआईवी संक्रमित होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
पीडीडीयू नगर। नगर स्थित पीपी सेंटर की ओर से की 2014 से 2026 तक 198 एचआईवी संक्रमितों की जांच की गई थी। इनमें से नगर व आसपास के क्षेत्र के 78 लोगों की निगरानी पीपी सेंटर से की जा रही है। शेष लोग जिले के अन्य सेंटर से अपना उपचार करा रहे है। नगर क्षेत्र में सबसे अधिक एचआईवी संक्रमितों की संख्या अलीनगर और कालीमहाल क्षेत्र में है। अलीनगर और काली महाल में 15-15 संक्रमित है। वहीं हनुमानपुर में 8, चतुर्भुजपुर में 3, हिनौली में 8, रेवसां में 4, दुलहीपुर में 5, चंदासी में 4, रविनगर में 2, शाहकुटी, 8, महाबलपुर में 3, गौसपुर, सकलडीहा और चकिया के 1-1 संक्रमित शामिल है। संवाद
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पांच साल के आंकड़े
वर्ष 2020-21 में कुल 1744 लोगों की जांच हुई। 17 केस मिले ।
वर्ष 2021-22 में 3840 लोगों की जांच हुई। 20 केस मिले ।
वर्ष 2022-23 में 4796 लोगों की जांच हुई। 27 केस मिले ।
वर्ष 2023-24 में 6698 लोगों की जांच हुई। 25 केस मिले ।
वर्ष 2024-25 में 6979 लोगों की जांच हुई। 24 केस मिले ।
वर्ष 2025-26 में 7820 लोगों की जांच हुई। 31 केस मिले ।
ऐसे होता है एचआईवी संक्रमण
पीडीडीयू नगर। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2014 से मार्च 2026 तक 198 मामलों में 165 लोगों को असुरक्षित यौन संबंध के चलते एचआईवी संक्रमण हुआ। इनमें में समलैंगिक याैन संबंध बनाने वाले दस पुरुष भी शामिल है। शेष लोगों ने महिला सेक्स वर्कर से असुरक्षित यौन संबंध बनाए थे। इसके अलावा नशे की लत वाले कुछ लोग लापरवाहीपूर्वक सुई से नशे के सेवन के चलते एचआईवी संक्रमण के शिकार हो गए। एचआईवी संक्रमित पुरुष अगर पत्नी से संबंध बनाता है तो महिला के साथ होने वाले बच्चे के भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। संवाद
इनसेट-
एचआईवी से ये है नुकसान
पीडीडीयू नगर। ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) हमारे शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। एचआईवी मुख्य रूप से सीडी 4 श्वेत रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है। ये कोशिकाएं शरीर को बीमारियों और संक्रमणों से बचाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। जैसे-जैसे ये कोशिकाएं कम होती जाती हैं, शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता (रोग प्रतिरोधक क्षमता) खत्म होने लगती है। प्रतिरक्षा प्रणाली के अत्यधिक कमजोर हो जाने पर ही एचआईवी संक्रमण एड्स का रूप ले लेता है। इससे सामान्य सर्दी-जुकाम या कोई भी छोटा संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है।
इनसेट-
हाथ छूने, साथ खाना खाने से नहीं फैलता है एड्स
पीडीडीयू नगर। विशेषज्ञों के अनुसार एचआईवी और एड्स छूने, साथ बैठने, खाना खाने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता है। एचआईवी का संक्रमण मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंधों, संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल, या संक्रमित रक्त के आदान-प्रदान से ही फैलता है। गले लगना या गाल पर चूमना, एक ही बाथरूम, शौचालय, तौलिए के उपयोग से भी एड्स नहीं होता है। खांसने या छींकने के दौरान हवा या पानी से मच्छर, खटमल या अन्य कीड़ों के काटने से एक ही बर्तन या गिलास में पानी पीने-खाना खाने से भी एचआईवी नहीं होता है।
डॉ. एसके चतुर्वेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पीपी सेंटर, पीडीडीयू नगर ने कहा कि एचआईवी संक्रमण को लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। एचआईवी के नोडल सच्चिदानंद चौबे, देवेश और सुजाता की ओर लगातार जांच की संख्या भी बढ़ाई गई है। एचआईवी संक्रमित मिलने पर उन्हें आवश्यक उपचार और दवाइयां अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराई जाती हैं। वर्ष 2026 में अप्रैल, मई और जून में कुल 12 एचआईवी संक्रमित मिले हैं।