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Chandauli News: सकल विश्व में भारत माता की हिंदी ही पहचान है-मनोज द्विवेदी मधुर

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चकिया के आदित्य पुस्तकालय परिसर में काव्य गोष्ठी के दौरान काव्य पाठ करते हरिवंश सिंह बवाल। संवा
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चकिया। नगर के वार्ड नंबर-6 सिविल लाइन पूर्वी स्थित आदित्य पुस्तकालय में रविवार को चंद्रप्रभा साहित्यिक मंच की ओर से मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देशभक्ति, समाज और लोकजीवन की कविताएं गूंजती रहीं। मनोज द्विवेदी ‘मधुर’ ने ‘सकल विश्व में भारत माता की हिंदी ही पहचान है’ गीत के माध्यम से हिंदी भाषा के गौरव को रेखांकित किया। इसके पूर्व वाणी वंदना से काव्य पाठ की शुरुआत की गई।
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गोष्ठी में धर्मेंद्र त्रिपाठी ने ‘कवियों की व्यंजना में, दुखियों की वंदना में, साधक की साधना में, माता तेरा वास हो’ प्रस्तुत कर सरस्वती वंदना की। राजेश विश्वकर्मा उर्फ राजू ने वर्षा ऋतु पर आधारित ‘काली घटा घनघोर घेरी के उमड़-घुमड़ के आओ बदरवा’ सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। बंधु पाल बंधु ने पानी के महत्व पर आधारित भोजपुरी रचना ‘पानी गए फिर न उबरै कोई, पानी से ही संसार रचाला’ के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया।
प्रदीप पाठक ने अपनी व्यंग्यात्मक रचना से समकालीन परिस्थितियों पर कटाक्ष किया। अलियार प्रधान ने ‘रो रहे को हंसाने की कोशिश करो, हंस रहे को हंसाने से क्या फायदा’ के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। राजेंद्र प्रसाद जूनियर ने ‘सुरों की विदाई है, शोर का जमाना है’ सुनाकर वर्तमान सामाजिक परिवेश पर टिप्पणी की। हरिवंश सिंह ‘बवाल’ ने ‘कविता कवि की बिटिया समझो, यह पायल की झंकार नहीं’ प्रस्तुत कर कविता की गरिमा को रेखांकित किया। गोष्ठी में जगजीवन और रामप्रवेश झाऊ ने भी काव्य पाठ किया।
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