कंदवा। श्रीमद्भागवत कथा ऐसा बागीचा है जिसमें बैठने से वाणी में मधुरता, माथे में शीतलता व हृदय में प्रसन्नता आती है। यदि मनुष्य भगवान के एक श्लोक का भी स्मरण करता है तो उनके जीवन में सदैव सुख व शांति बनी रहती है।
यह बातें चिरईगांव में चल रहे चतुर्मास यज्ञ में बृहस्पतिवार को त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुंदर राज महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा कि सुख-शांति प्राप्त करने के लिए कथा जरूर सुनना चाहिए। यदि हृदय में प्रभु की पुकार व होठों पर प्रभु का नाम है तो कभी यमलोग नहीं जाना पड़ेगा। इसलिए निश्छल भाव से ईश्वर की आराधना कर जीवन धन्य बनाएं। कहा कि कथा का श्रवण ही मानव जीवन के उद्धार की सीढ़ी है। इसमें लोगों के श्रद्धा की गहराई मायने रखती है क्योंकि उसी गहराई के अनुसार भक्ति का फल मिलता है। कहा कि सत्संग से व्यक्ति का जीवन बदल जाता है। जीवन में जाने-अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते हैं। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। व्यक्ति को क्रोध, लोभ, मोह व हिंसा का त्याग कर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करना चाहिए। इस मौके पर आकांक्षा सिंह, सीमा, उदय नारायण सिंह, सोन, भूपेंद्र सिंह, शमसुद्दीन, रामानंद यादव मौजूद रहे।