चंदौली में अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ा कर पांच लाख रुपया करने से खुशी जाहिर की। अधिवक्ता कल्याण निधि के बढ़ोतरी होने के कारण अधिवक्ताओं के परिजनों को इससे राहत मिलेगी लेकिन वहीं कुछ अधिवक्ताओं ने इसे चुनावी जुमला बताया है। इस पर लोगों ने अलग-अलग अपनी प्रतिज्ञा व्यक्त कर उसने सरकार के कदम की सराहना की।
अधिवक्ताओं की ओर से प्रदेश सरकार को कई बार अधिवक्ता कल्याण कोष की धनराशि को बढ़ाने की मांग की गई थी। अब जब सरकार ने अधिवक्ता कल्याण निधि की धनराशि 1.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी। इस संबंध में शिवाकांत पांडेय ने कहा कि अधिवक्ता सरकारी कर्मचारी नहीं है। एक विधिक व्यवसाय है। संघर्ष के बाद जीवन का अंतिम पायदान आने पर आश्रितों को सहायता मिलेगी। सुनील कुमार सिंह ने कहा कि चुनाव आने से पूर्व सरकार की ओर से इस धनराशि का ऐलान करना चुनावी झुनझुना है।
सरकार इतने ही हितैषी होती तो पहले ही इस कोष की स्थापना कर देती और अधिवक्ताओं को पेंशन के बारे में सोचती। वीरेंद्र प्रताप सिंह दाढ़ी ने कहा कि अधिवक्ता कल्याण निधि से परिजनों को राहत मिलेगी और इससे अधिवक्ताओं के न होने पर परिवार को इससे सहारा मिलेगा। राकेश रतन तिवारी ने कहा कि सरकार का यह कदम सराहनीय है। इससे अधिवक्ताओं के परिजनों को थोड़ी राहत मिलेगी अगर सरकार अधिवक्ताओं का थोड़ा भी चाहे तो पेंशन की भी व्यवस्था करें, ताकि अधिवक्ताओं को भी सहारा मिल सके।